दिल्ली में ऑड-ईवन नियम का उल्लंघन करते हुए भाजपा के कई सांसद सोमवार को ऑड नंबर की अपनी-अपनी गाडियों से संसद पहुंचे जबकि दिल्ली सरकार ने संसद पहुंचने के लिए विशेष सेवा लगाई थी। परन्तु कुछ बीजेपी नेताओं ने परवाह किये बिना लोकतंत्र के प्रतीक संसद में पहुंचे तो लोकतंत्र के कानून और नियमों को कुचल कर!

Odd even rule in Delhi

इनमें से एक थे मशहूर एक्टर और सांसद परेश रावल भी थे। इसके अलावा भाजपा सांसद अश्विनी मीणा भी अपनी ऑड नंबर गाडी से संसद पहुंचे। हालांकि इन दोनों सांसदों ने अपनी गलती मान ली।

बता दें कि दिल्ली सरकार ने सांसदों को बजट सत्र के दौरान संसद जाने के लिए इस नियम से छूट देने के बजाय उनके लिए एम-सोशल डीटीसी बस सर्विस शुरू की है। दिल्ली सरकार ने इस सेवा के तहत 6 बसें चलाई हैं। लेकिन इक्का-दुक्का सांसद ही बस में नजर आए।

इस नियम का उल्लंघन करने वाले सांसदों में भाजपा के चौधरी बाबूलाल, प्रहलाद पटेल, उदित राज, अश्विनी चोपडा, परेश रावल, केपी मौर्य और बीसी खंडूरी शामिल हैं। बॉलीवुड से राजनीति में आए परेश रावल को भी इस नियम का उल्लंघन करते हुए पाया गया। हालांकि, गलती का अहसास होने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्लीवासियों से माफी मांगी। उन्होंने कहा, संसद जाने के लिए ऑड नंबर की गाडी से यात्रा कर बडी गलती की है। अरविंद जी (केजरीवाल) और दिल्लीवासियों से माफी मांगता हूं। वहीं भाजपा सांसद अश्विनी मीणा ने भी कहा कि गलती हो गई। चालान कटवाऊंगा, ऑड गाडी में आ गया हूं।

दूसरी ओर, जिन दो सांसदों ने इस सेवा का इस्तेमाल किया, उनमें भाजपा की रंजन भट्ट और हरिओम सिंह राठौर शामिल हैं। रंजन भट्ट ने कहा कि वह इस बस सेवा से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा, मैं इस सेवा से बेहद खुश हूं, मैं इसका समर्थन करती हूं। यह प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में अच्छा कदम है।

ऐसे में सवाल पैदा होता है कि क्या बीजेपी नेताओं के लिए कोई कानून कोई नियम महत्व नहीं रखता और खुद को वे लोकतंत्र के सबसे बड़े रक्षक कहते है। इससे पहले भी एक बीजेपी नेता ने जानबूझ कर कानून का उल्लंघन किया था और उन्हें चालान कटवाना पड़ा था। सबसे अहम बात यह है कि दो नेताओं ने अपनी गलती मानी जिससे पता चलता है कि उन्हें देश और राज्य सरकरों के कानून और नियमों का मान तो है लेकिन बाकी ने तो उल्टा सवाल खड़ा कर दिया। ऐसे में बीजेपी नेताओं का मार्ग और लोकतंत्र का मार्ग अलग अलग नजर आता है तो वे कैसे लोकतंत्र के रक्षक हैं! और उनसे क्या उम्मीद बांधी जा सकती है?

साभार: hindkhabar.in


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