लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दस महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले विधानपरिषद की 36 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। उनमें से आठ जगहों पर तो समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए। क्योंकि इन आठ सीटों पर बीजेपी ने जो प्रत्याशी खड़े किए थे, उन्होंने चुनाव से ऐन पहले समाजवादी पार्टी के पक्ष में अपना नाम वापस ले लिया।

मुजफ्फरनगर विधानसभा उपचुनाव जीतकर लखनऊ में बीजेपी जो जश्न मना रही थी। अब वो फीका पड़ता नजर आ रहा है। क्योंकि यूपी में विधानपरिषद चुनाव के दौरान जिन सूरमाओं पर भारतीय जनता पार्टी ने दांव आजमाया, उन्होंने ही पार्टी की साख दांव पर लगा दी। बीजेपी ने यूपी में विधानपरिषद की जब 36 सीटों पर रातों रात उम्मीदवार खड़े किए तो इन्हीं में से आठ कैंडिडेट ने पार्टी को ऐन मौके पर धोखा दे दिया।

और पढ़े -   राष्ट्रगान ना गाने पर योगी सरकार करेगी मदरसों पर एनएसए के तहत कार्रवाई

8 सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों ने अचानक अपना नाम वापस ले लिया। इन आठों सीटों पर समाजवादी पार्टी निर्विरोध जीत गई। लखनऊ-उन्नाव सीट पर बीजेपी ने अनिरुद्ध चंदेल को उतारा था। बीजेपी के अनिरुद्ध चंदेल ने नामांकन खत्म होने से तीन मिनट पहले अपना नाम वापस ले लिया। बांदा-हमीरपुर सीट पर बीजेपी ने सपा के पुराने नेता आनंद त्रिपाठी को उतारा।

बीजेपी से टिकट पाए आनंद त्रिपाठी ने ऐन वक्त पर नाम वापस ले लिया। मेरठ-गाजियाबाद सीट पर समाजवादी पार्टी के वीरेंद्र सिंह को बीजेपी ने उतारा। अगले ही दिन पुराने सपाई वीरेंद्र सिंह बीजेपी छोड़ वापस समाजवादी पार्टी में चले गए।

और पढ़े -   गुजरात में स्वाइन फ्लू का कहर, मरने वालों की संख्या पहुंची 242 तक

दस महीने बाद यूपी में चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले मानो विधानपरिषद चुनाव में बीजेपी को उम्मीदवार ढूंढे नहीं मिल रहे थे। मुलायम सिंह के समाजवादियों को टिकट दिया, जिन्होंने बीजेपी को ऐन वक्त पर धोखा दिया। अब पार्टी इसका ठीकरा अखिलेश सरकार पर फोड़ रही है।

36 में से आठ सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल करने वाली समाजवादी पार्टी के खेमे में उत्साह है। मुलायम सिंह के नेता विधानसभा चुनाव से पहले ही इसे अखिलेश सरकार की जीत के दावे करने लगे हैं। बीजेपी की पस्त हालत के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

और पढ़े -   मध्यप्रदेश: शिवराज के मंत्री ने किया स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रध्वज का अपमान

3 मार्च को यूपी में विधानपरिषद की बाकी बची 28 सीटों पर वोटिंग होनी है। लेकिन बीजेपी को डर है कहीं उसके बाकी कैंडिडेट भी उससे पहले मैदान से बाहर ना हो जाएं।

हरियाणा में जाट करीब 26 फीसदी हैं। विधानसभा की नब्बे में से तीस सीटों पर जाट वोटबैंक का खासा असर है। जाटों के आरक्षण की मांग आगे बढ़ी तो इसका असर यूपी और राजस्थान तक पहुंचेगा। (News24)


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE