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भोपाल सेंट्रल जेल से कथित रूप से फरार होने के बाद कथित एनकाउंटर में मारे गये सिमी सदस्यों को मध्यप्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान ने खूंखार आतंकी बता कर उनकी मौत को अपनी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताने की कोशिश की थी.

मुख्यमंत्री ने उस वक़्त कहा था कि मारे गए आरोपी सिमी के ‘खूंखार आतंकवादी’ थे, अगर उन्हें छोड़ दिया जाता तो वे कई आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे सकते थे, इसके अलावा उन्होंने मध्य प्रदेश स्थापना दिवस समारोह (1 नवंबर) पर एकत्र हुई जनता को संबोधित करते हुए लोगों से ‘खूंखार आतंकवादियों’ की हत्या के समर्थन में हाथ उठाने के लिए कहा था.

इसके साथ ही राष्ट्रवाद की हिलोरों में बह रहे मीडिया के एक वर्ग ने इन सभी आठों सिमी सदस्यों को विचाराधीन कैदी बताने के बजाय खूंखार आतंकी के लफ्ज से नवाजा था. जबकि पत्रकारिता के नियमों के अनुसार किसी भी आरोपी पर अदालत द्वारा दोषी करार न दिए जाने तक उसके लिए कथित शब्द का इस्तेमाल किया जाता हैं.

ऐसे में अब सोमवार को राज्य सरकार द्वारा इस मामले की न्यायिक जांच के लिए जारी की गई अधिसूचना में  सामान्य प्रशासन विभाग ने मरने वाले सभी कथित सिमी सदस्यों को आतंकवादी के बजाय ‘विचाराधीन कैदी’ बताया हैं.

इस को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि भोपाल सेंट्रल जेल में जेल में रखे गए आठ सिमी सदस्यों में से कोई दोषी करार नहीं दिया गया था इसलिए वे कानूनी तौर पर और आधिकारिक तौर पर केवल ‘विचाराधीन कैदी ‘ थे.


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