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प्रतिबंद्धित संगठन सिमी के आखिरी अध्यक्ष रहें डॉ. शाहिद बद्र फलाही ने भोपाल मुड़भेड कांड पूरी तरह फर्जी बताते हुए आरोप लगाया कि रात में ही कैदियों को जंगल में ले जाकर मुठभेड़ में मार दिया गया. ह कुछ ऐसी ही फर्जी मुठभेड़ है, जैसे इशरत जहां और बटला एनकाउंटर था. वहीं तेलंगाना में पेशी पर ले जाते समय भागने की बात कह कर हथकड़ी लगे मुसलमानों को मार दिया गया.

उन्होंने इस कांड की उच्च स्तरीय जांच किए जाने की मांग करते हुए कहा कि सभी जेल अधिकारियों को निलंबित कर गिरफ्तार कर कड़ी पूछताछ की जानी चाहिए. इसके अलावा उन्होंने अवाल उठाते हुए पूछा कि गर मारे गए आठों लोग इतने खतरनाक आतंकवादी थे तो उन्हें एक साथ एक बैरक में क्यों और कैसे रखा गया? उन्होंने कहा कि देश की अति सुरक्षित जेल के कई तालों को एक रात में कोई खोल या तोड़ पायेगा यह नामुमकिन है.

इसके अलावा उन्होंने कथित एनकाउंटर में मारे गये लोगों का सिमी सदस्य होने से इनकार करते हुए कहा कि 27 सितम्बर 2001 में स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया सिमी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था.

उन्होंने कहा कि प्रतिबंध के बाद सिमी ने कभी कोई सदस्य नहीं बनाया तो किस आधार पर इन्हें सिमी का सदस्य बताया जा रहा है. उन्होंने कहा बिना किसी जांच के मारे गये लोगों को सिमी सदस्य बताना गलत हैं.


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