मालदा के कालियाचक थाने पर हमले के मामले में पुलिस ने 10 लोगों को गिरदफ्तार किया है लेकिन राजनीतिक आरोप प्रत्‍योराप जारी हैं।

पश्चिम बंगाल के मालदा के कालियाचक पुलिस स्‍टेशन पर हमले के मामले में 48 घंटे बाद 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम मोतीउर रहमान, जबदुल शेख, सिनत शेख, गफ्फार शेख, अख्‍लाशुर रहमान, बेनामिन शेख, लालू मोमिन, मोहम्‍मद अशदुल हक, फारूक शेख और मोहम्‍मद रशिदुल हक हैं। इन्‍हें मंगलवार को मालदा कोर्ट में पेश किया गया जहां से मोतीउर रहमान, जबदुल शेख और रशिदुल को तीन की कस्‍टडी जबकि बाकी अन्‍य को 14 की कस्‍टडी में भेज दिया गया। इन पर धारा 147, 148, 149, 353, 332, 323, 225, 427,435, 436 और 186 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

डिप्‍टी सुपरिटेंडेंट दिलीप हाजरा ने बताया कि उन्‍हें गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ गैर जमानती धाराएं लगाई गई। हम मामले की जांच कर रहे हैं, आगे और गिरफ्तारियां हो सकती है। इसी बीच मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक रूप से एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का दौर जारी है और प्रत्‍येक पार्टी एक दूसरे पर दोष मढ़ रही है। तीन जनवरी को रैली आयोजित करने वाले संगठन इदारा ए शरिया ने कहाकि उनकी रैली शांतिपूर्ण तरीके से चल रही थी और पुलिस ने हिंसा की शुरुआत की और बाद में बाहरी लोगों ने हमला किया।

हमने हमारे पैंगबर के अपमान के खिलाफ शांतिपूर्ण मार्च आयोजित किया था। जब हमने कालियाचक पुलिस स्‍टेशन के बाहर कमलेश तिवारी का पुतला जलाना चाहा तो पुलिस ने पहले आपत्ति जताई और बाद में लाठीचार्ज किया। हमारा कोई सदस्‍य हिंसा में शामिल नहीं था। पुलिस स्‍टेशन में तोड़फोड़ से हमारा कोई लेना देना नहीं है। यह सब असामाजिक तत्‍वों ने किया जो भीड़ में शामिल हो गए और पुलिस पर अपना गुस्‍सा उतारा।

भाजपा के राष्‍ट्रीय सचिव और पूर्व प्रदेशाध्‍यक्ष राहुल सिन्‍हा ने कहा कि वह इस मामले में बुधवार को राज्‍यपाल से मिलेंगे। उन्‍होंने कहाकि पुलिस ने मुख्‍य आरोपियों को नहीं पकड़ा। हमारी मांग थी कि वास्‍तविक दोषी जिन्‍हें तृणमूल कांग्रेस का वरदहस्‍त है उन्‍हें गिरफ्तार किया जाए। दादरी मामले के बाद पूरे देश में असहिष्‍णुता की बहस चल पड़ी लेकिन कालियाचक में जो कुछ हुआ उस पर बुद्धिजीवी लोग सड़कों पर नहीं उतर रहे।

हम मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी से मांग करते हैं कि वह मुसलमानों को खुश करने की राजनीति बंद करें और इस घटना की आधिकारिक रूप से निंदा करें। वहीं मालदा दक्षिण से कांग्रेस सांसद अबू हसीम खान चौधरी ने घटना के लिए तृणमूल के गुंडों को दोषी ठहराया और आरोप लगाया कि पुलिस ने कुछ नहीं किया। उन्‍होंने कहाकि वे लोग धार्मिक भीड़ में शामिल हो गए और पुलिस स्‍टेशन पर हमला बोल दिया। पुलिस की ओर से कुछ नहीं किया गया। उनके पास पहले से भीड़ जमा होने की सूचना थी लेकिन उन्‍होंने कोई तैयारी नहीं की। चौधरी ने इस मामले में सोमवार को कलेक्‍टर से भी मुलाकात की थी। मालदा जिले में साम्‍प्रदायिक तनाव की घटनाएं होना आम बात हो गई है।

पिछले साल इस तरह की तीन बड़ी घटनाएं हुई। * जनवरी 2015 में हिंदू मुस्लिम झड़प में एक व्‍यक्ति की जान गई। * 2015 के मध्‍य में इंग्लिश बाजार पुलिस स्‍टेशन के तहत मोहोदीपुर के खासीमारी क्षेत्र में हिंदू मुस्लिमों के झगड़े में तीन लोग मारे गए। * सितम्‍बर में पूजा के लिए तैयार की गई मूर्तियों के तोड़े जाने का मामला सामने आने के बाद जिले में तनाव का माहौल रहा था। मूर्तियां तोड़ने का आरोप मुस्लिमों पर लगा। हालांकि पुलिस ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया। साभार: जनसत्ता


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