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मध्यप्रदेश के बालाघाट में आरएसएस प्रचारक के खिलाफ कारवाई करने की वजह से अपनी पूरी टीम के साथ निलंबन और हत्या, दंगा करवाने और लूटपाट करने की धाराओं में केस का सामना कर रहें टीआई जिया उल हक़ ने कहा कि आरएसएस प्रचारक की गिरफ्तारी से सरकार के अहम (Ego) को ठेस पहुंची है.

हक ने कहा कि पुलिस में 90 प्रतिशत स्टाफ हिंदू है लेकिन धर्म की वजह से इस मामले को हाई लाइट किया गया. उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रचारक सुरेश यादव की गिरफ्तारी में मेरे अलावा सभी अफसर और सिपाही हिन्दू थे. अधिकारियो के निर्देश पर कार्यवाही की गयी लेकिन मैं मुस्लिम हूँ इसलिए सारा ठीकरा मेरे ऊपर फोड़ा जा रहा.

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उन्होंने आगे कहा कि पुलिस टीम ने यादव को उस समय गिरफ्तार किया जब उसके फोन को सीज कर लिया गया, जिससे वॉट्स एप के जरिए मैसेज भेजा गया था. यादव की पहली मेडिकल रिपोर्ट में किसी तरह की इंजरी होने की बात सामने नहीं आई थी. यादव की गिरफ्तारी के विरोध में सैकड़ों हिंदू कार्यकर्ताओं ने थाने को घेर और हिंदुवादी नारे लगाए जाने लगे. उनकी मांग थी कि मुझे उनके हवाले किया जाए और मेरा नाम लेकर मुझे पाकिस्तान भेजने की बात कर रहे थे.

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उन्होंने कहा कि शिवराज सरकार में मुस्लिम के लिए काम करना कितना मुश्किल है ये आप ऐसे भी समझ सकते है कि उन पर स्थानीय चुनाव में मुस्लिम कैंडिडेट को सपोर्ट करने का आरोप भी लग चुका है. उन्होंने कहा, ‘यह बहुत ही छोटा मामला था जिसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया गया. मुझे सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि मीडिया के एक वर्ग द्वारा मुझे सांप्रदायिक बताया गया. मुझे पाकिस्तानी मानसिकता वाला बताया गया.

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