गोरखपुर: गोरखपुर में सोमवार की रात अंर्तराष्ट्रीय इस्लामिक विद्वान अलजामियतुल अशरफिया मुबारकपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मौलाना मसूद अहमद बरकाती की जेरे सरपरस्ती में मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार का 7वां दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ। मौलाना मसूद अहमद बरकाती ने कहा कि मुसलमानों ने इस्लाम से दूरी बना ली है, सिर्फ नाम के रह गए हैं मुसलमान। उन्होंने कहा कि नाम के नहीं बल्कि अमल से मुसलमान बनो। दुसरो को सुधारने से पहले खुद के अंदर सुधार लाया जाये। इसी से सामाजिक सुधार संभव हैं। मदरसे से फारिग होने वाले तोलबा हासिल इल्म को अमल में लाये दूसरों तक भी पहुंचाएं.
मौलाना मसूद अहमद बरकाती ने कहा कि रसूल की शान सुनकर जिस शख्स के दिल में ठंडक न पहुंचे उसके सीने में धड़कने वाला दिल मोमिन का हो ही नहीं सकता। आज दुनिया की आबादी पौने 6 अरब है। इसमें मुसलमानों की तादाद 1 अरब 40 करोड़ है। 56-57 इस्लामी देश है। तेल का जखीरा है। दौलत की कमी नहीं है। उसके बावजूद मुसलमानों के हालात खराब है। उन्होंने कहा कि आज मुसलमानों के सामने इतनी समस्याएं हैं कि समस्याएं गिनते-गिनते वक्त गुजर जाए। इसकी वजह यह है कि मुसलमानों को जहां से इज्जत मिली उस केंद्र यानि रसूल मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम व कुरान से उन्होंने दूरी अख्तियार कर ली।
जब मुसलमानों के पास कफन का कपड़ा तक मयस्सर नहीं था। उस वक्त इस्लाम बुलंदियों पर था। रसूल के जमाने में इस्लाम पर चलना मुश्किल था, लेकिन आज इस्लाम पर चलना आसान है। मुसलमानों का फिर से उसी मरकज से अपना रिश्ता कायम करना होगा, जहां से उसे इज्जत मिली थी और मिलेगी।

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