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काफी दिनों से इत्तेहाद को लेकर की जा रही चर्चाओं को विराम देते हुए बरेली दरगाह-ए-आला हजरत की तरफ से इस विवाद को खत्म करने की पहल की गयी है। इसके तहत बरेलवी मुफ्तियों का एक पैनल गठित किया गया है। साथ ही उनकी तरफ से यह उम्मीद जताई है कि देवबंदी भी एक पैनल बनाएंगे, जिसमें दोनों मसलकों के आलिम वर्षो पुराने मतभेद को खत्म करने का प्रयास करेंगे।

क्यों बनाना पड़ा पैनल ?

गौरतलब है की पिछले पखवाड़े मौलाना तौकीर रज़ा के देवबंदी दौरे से उठे विवाद ने काफी तूल पकड़ लिया था जिसे लेकर खानदाने आला हज़रत में उनके बायकाट की बात तक कही गयी थी. वहीँ मौलाना तौकीर रज़ा ने इसे वक़्त की ज़रूरत बताया था.

इस मुद्दे को लेकर बरेली दरगाह से ऐलान किया गया था की हम इत्तेहाद के लिए तैयार है बस देवबंदी चार शर्तों को मान लें. हालाँकि देवबंद की तरफ से ये जवाब आया था की जिन शर्तों की बात बरेली के मौलाना कर रहे है उनपर पहले की काफी बार चर्चा की जा चुकी है ओर इनका जवाब दिया जा चूका है.

क्या काम होगा इस पैनल का ?

इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए बरेली की तरफ से देवबंदी-बरेलवी लड़ाई को खत्म करने के लिए एक पैनल बनाया गया है इस पर दरगाह की ओर से जारी प्रेस नोट में कहा गया कि इत्तेहाद तभी हो सकता है कि जब देवबंद आलिमों की तरफ से की गई खुदा और रसूल की शान में गुस्ताखी मसले पर कोई हल निकले। कहा गया कि इसके लिए दोनों मसलकों के आलिमों का पैनल बने जो आपस में बातचीत करे और यह तय हो कि देवबंदी आलिमों ने अल्लाह और रसूल की शान में गुस्ताखी की या नहीं। फिर जो फैसला आए आवाम में आम किया जाए। वहीं इस कड़ी में दरगाह की तरफ से पैनल भी गठित कर दिया गया। जिसमें मौलाना मुख्तार अहमद कादरी, मौलाना सगीर अहमद जोखनपुरी, मौलाना हनीफ खां रजवी, मुफ्ती शमशाद हुसैन रजवी, मौलाना मो। आकिल रजवी, मौलाना अब्दुस्सत्तार हम्दानी, मौलाना अफजाल अहमद रजवी, मुफ्ती मो। सलीम नूरी, मुफ्ती अफरोज आलम नूरी, मुफ्ती मुतीउर रहमान, मौलाना सगीर अख्तर शामिल हैं।

वैसे इसमें दो राय नही है देश के मुसलमान इन दोनों इदारों पर नज़रें गड़ाएं किसी उम्मीद की नज़र से देख रहे है.


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