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आजमगढ़ के गावं नदवा सराय के रहने वाले कमांडर रज़ीजुद्दीन दानिश खान LOC पर पाकिस्तान की सेना का मुकाबला करते हुए देश की सुरक्षा में शहीद हो गए. 25 वर्षीय दानिश कश्मीर में तैनात थे. उनकी शादी को 9 महीने भी पुरे नहीं हुए हैं. इसी साल 26 फरवरी को उनकी शादी हुई थी.

उनकी शहादत की खबर लगते ही गाँव में सन्नाटा पसरा हुआ हैं. हालांकि अभी उनका पार्थिव शरीर उनके गाँव नहीं पहुंचा हैं. ऐसी स्थिति में घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल हैं. गाँव वालों के अनुसार, शहीद के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. कईयों के आंसू इसलिए सूख गए है कि उनका बेटा सरहद पर शहीद हुआ है.

सोशल मीडिया पर दानिश की शहादत को लेकर सलीम जावेद लिखते हैं..

मेरे शहर से तीन किलोमीटर के फासले पर एक छोटा सा गाँव है, जिसका नाम ‘नदवा सराय’ है। जो मऊनाथ भंजन आज़मगढ़ में आता है। उसी मिटटी का एक लाल कश्मीर बॉर्डर पर कल शहीद हो गया, जिसकी पहचान ‘रज़ीउद्दीन खान दानिश’ नाम से है। यह उसी मिटटी का लाल है जिसे प्रधानमंत्री जी के मंत्री आतँकगढ़ के नाम से पुकारते हैं, उसी मिटटी का एक लाल देश के लिए क़ुर्बान हो गया।

मीडिया चुप है, शायद शहीदों के अंदर भी धर्म ढूंढा जा रहा है। रज़ीउद्दीन, आज तुमने एक ऐसे मिटटी का नाम रौशन किया है, जिसके माथे पर आतंक का लेबल लगाया जाता रहा है। गर्व से सीना चौड़ा हो रहा है। इतना गर्व हमें तुम पर है तो सोच रहा हूँ तुम्हारे मां-बाप को तुम पर कितना नाज़ होगा।


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