असम गण परिषद के साथ गठबंधन के चलते बीजेपी में फूट पड़ गई है। राज्‍य में पार्टी के एक धड़े ने शीर्ष नेतृत्‍व के इस फैसले से नाराज होकर नई पार्टी बनाने की घोषणा कर दी है, जिसका नाम तृणमूल बीजेपी रखा गया है। बीजेपी से बगावत करने वाले नेताओं की यह पार्टी उन सभी 26 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जो असम गण परिषद को दी गई हैं।

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बीजेपी से अलग हुए धड़े में शामिल बिश्‍वजीत फुकन ने कहा कि पार्टी ने जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को नजरअंदाज किया है। हम अगले कुछ दिनों में तृणमूल बीजेपी के उम्‍मीदवारों के नाम का एलान कर देंगे। आपको बता दें कि एक जमाने में ममता बनर्जी कांग्रेस की लीडर हुआ करती थीं और बाद में उन्‍होंने तृणमूल कांग्रेस नाम से नई पार्टी बनाई थी, जो आज पश्चिम बंगाल में राज कर रही है। अब बीजेपी से भी एक तृणमूल नाम की पार्टी निकली है, देखना होगा कि इसे विधानसभा चुनाव में कितनी सफलता मिलती है। बीजेपी में पड़ी इस फूट से विरोधी दल काफी खुश हैं। हालांकि, बीजेपी के शीर्ष नेतृत्‍व ने इस बारे में अब तक कुछ नहीं कहा है।

असम में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। असम गण परिषद पहले भी एनडीए में शामिल हो चुकी है। इसके प्रमुख प्रफुल्ल महंता हैं। छात्र राजनीति से पॉलिटिक्‍स में परचम लहराने वाले महंता साल 1985 से 1990 तक और साल 1996 से 2001 के बीच दो बार असम के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राज्‍य में पिछले 15 सालों से कांग्रेस सत्ता में है और इस समय तरुण गोगोई मुख्यमंत्री हैं। बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनेवाल को राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। 2011 में 126 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 6 सीटें मिली थीं, जबकि असम गण परिषद ने 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस ने 68 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, लेकिन इस बार जो एग्जिट पोल आए हैं, उनमें बीजेपी के जीतने की संभावना जताई गई है। (hindkhabar)


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