उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में रविवार को पहली बार सेना प्रमुख बिपिन रावत शहीद वीर अब्दुल हमीद के 52वीं शहीद दिवस समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे.

इस दौरान उन्होने शहीद की मूर्ति का अनावरण किया साथ ही उनकी विधवा पत्नी रसूलन बीबी का खुले मंच पर स्वागत किया. ध्यान रहे 10 सितम्बर अब्दुल हमीद की शहादत का दिन है. इसी दिन उन्होंने पाक के साथ युद्ध में साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तान के पैटन टैंक को नष्ट किया था. उन्हें मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र प्रदान किया था.

कार्यक्रम के दौरान 1965 और 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं को सम्मानित किया. साथ ही इलाके के लोगों की मांग पर आर्मी चीफ ने गाजीपुर में एक सैनिक ट्रेनिंग सेंटर खोले जाने की भी घोषणा की. दरअसल, जनवरी 2017 में नए आर्मी चीफ बनने के बाद रसूलन बीबी ने चीफ रावत से मुलाकात की थीं.

इस दौरान उन्होंने आग्रह किया था कि उनके जीते जी वो एक बार शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके मेमोरियल आएं. हर साल 10 सितंबर को शहीद अब्दुल हमीद का परिवार उनके लिए एक सभा का आयोजन करता है.

ऐसे में शहीद परमवीर चक्र अब्दुल हमीद की पत्नी की वृद्धावस्था को देखते हुए जनरल रावत ने खुद गाजीपुर जाने का फैसला किया. रावत ने कहा कि मुझे शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत समारोह में निमंत्रण देकर बुलाया गया. इसके लिए मैं अपने आपको गर्व महसूस कर रहा हूँ.

उन्होंने मैं यहां आकर धन्य हो गया. हमें सोचना हैं कि उनकी शहादत बेकार ना जाये. गाजीपुर की जो धरती है, यहां से लोग लगातार सेना में आकर देश के लिए अपना योगदान देते हैं.


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