मध्यप्रदेश के मंदसौर में आंदोलन के दौरान पुलिस की गोलीबारी में सात से ज्यादा किसानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. आज इस घटना को 16 दिन का वक्त गुजर चूका है. बावजूद इसके बीते 16 दिनों में 16 किसान  आत्महत्या कर चुके हैं.

इन सभी किसानों ने कर्ज के बौझ के तले अपनी जान दी है. इन किसानों ने ऐसे वक्त आत्महत्या की है जबकि राज्य के मुख्यमंत्री किसानों की मांगों को मानने का दावा कर चुके है. साथ ही किसानों के लिए कई योजनाओं शुरू करने की भी बात कह चुके है.

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, छतरपुर जिले में दो और किसानों ने कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या कर ली.  बताया जा रहा है कि दोनों किसान फसल खराब होने से परेशान थे. और दोनों पर भारी ब्याज का कर्ज था. जिसे चुकाने में वे असमर्थ थे.

ऐसे में स्पष्ट है कि किसानों को लेकर किये जा रहे बीजेपी के दावे केवल खोखले है. इस बात की पुष्टि इसी से होती है कि मुख्यमंत्री का गृहनगर भी किसानों की आत्महत्या से अछुता नहीं है.

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