एएमयू के कानून संकाय की ओर से शनिवार को मूटकोर्ट का आयोजन किया गया। जजों ने छात्रों को कानून की बारीकियों से अवगत कराने के अलावा सफलता के मंत्र भी बताए।

अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक अधिकारों पर आयोजित ‘प्रथम पीए इनामदार राष्ट्रीय मूटकोर्ट’ मुकाबले का उद्घाटन करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना ने कहा कि पैगंबर इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब ने कहा है कि ज्ञान प्राप्त करो ‘मा की गोद से कब्र तक’। एक लड़की की शिक्षा से पूरी नस्ल शिक्षित होती है। कहा कि शिक्षा को नैतिक मूल्यों से लिंक करना चाहिए और शिक्षा संस्थाओं में मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना चाहिए।

न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव ने कहा कि वह स्वयं भी शिक्षक रह चुके हैं, शिक्षकों का बहुत सम्मान करते हैं। शिक्षक ही राष्ट्र का भविष्य तय करते हैं। छात्रों के बिना शिक्षकों का कोई अस्तित्व नहीं होता। हर वकील को सुप्रीम कोर्ट में ही नहीं भागना चाहिए बल्कि जिला कोर्ट में भी काम करने के अच्छे अवसर होते हैं। हमें पैसे के लिए दौड़ने की जरूरत नहीं है। मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखना चाहिए।

न्यायमूर्ति राजन राय ने कहा कि यह संस्था भारत की मिश्रित संस्कृति की प्रतीक है। संविधान ने अल्पसंख्यकों को अपनी संस्था स्थापित करने ओर उसको चलाने का संवैधानिक अधिकार दिया है।

एएमयू कुलपति जमीर उद्दीन शाह ने कहा अल्पसंख्यकों को देश में समान सुविधा उपलब्ध हैं, परन्तु दुर्भाग्य से भारतीय मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हुए हैं। सहकुलपति एस अहमद अली ने कहा कि भारतीय संविधान की धारा 30(1) में अल्प संख्यकों के हितों की रक्षा को सर्वोपरि बताया गया है। धार्मिक, भाषायी आधार पर कोई भेदभाव नहीं है। भारतीय संसद का कानून सर्वोपरि है और संसद को ही अल्पसंख्यक संस्था बनाने का अधिकार प्राप्त है। एमजी विश्वविद्यालय विद्यापीठ की स्थापना भी पार्लियामेंट एक्ट से हुई थी।

कानून विभागाध्यक्ष इकबाल अली खान ने अतिथियों का स्वागत, डीन प्रो. जावेद तालिब ने धन्यवाद ज्ञापित और लॉ सोसायटी के संयुक्त सचिव फरहान शम्सी व समरीन अहमद ने संचालन किया। (jagran)


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