हाल ही में कश्मीर में अमरनाथ यात्रा से लौट रहे यात्रियों पर हुए आतंकी हमले का सभी धर्म और मजहब के लोग एक स्वर में विरोध कर रहे है. इसी क्रम में हिन्दू-मुस्लिम एकता की प्रतीक बाराबंकी के देवा में महान सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की दरगाह पर इस हैवानियत की मजम्मत की गई.

हमले के विरोध में  गुरुवार को देवा शरीफ कस्बे में सैकड़ों की संख्या में बच्चे, बुजुर्ग और युवको ने इकट्ठा होकर हु जोरदार प्रदर्शन कर आतंकियों के खिलाफ नारेबाजी की और काली पट्टी बांधकर एक स्वर से इस आतंकी हमले की निंदा की. इन सब ने कहा कि ऐसे आतंकियों को किसी भी सूरत माफ नही किया जाना चाहिए.

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लोगों का कहना था कि हम सब हाजी वारिस अली शाह के मानने वाले हैं. जिनका संदेश था जो रब है वही राम है और आतंकी जिनका कोई मजहब नहीं होता. इनका पूरी ताकत के साथ विरोध करना चाहिए. इनको किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए.

हाजी वारिस अली शाह की  कौमी एकता व साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए दरगाह पूरी दुनिया में जानी जाती है. हाजी वारिस अली शाह साहब ने ‘जो रब है वही राम है’ का संदेश देकर कौमी एकता को मजबूत किया था. आज भी उनके दीवाने इस संदेश को पूरी दुनिया में फैला रहे है.

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