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शनिवार की रात को बेदर्दी के साथ अलवर में कथित गौरक्षा के नाम पर मुस्लिमों युवक की पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में अलवर पुलिस ने आरोपियों को बचाने के लिए पहले ही पूरी कहानी तैयार कर ली है.

दरअसल, इस वारदात के बारे में पुलिस को पहले ही जानकारी थी. पुलिस ने जिस दिन उमर की हत्या हुई थी उस दिन सड़क किनारे मिली गाड़ी में गाय को बरामद दिखाकर इनके खिलाफ ही गो तस्करी का मामला दर्ज कर लिया था. हालांकि मामले की आगे की जांच नहीं की गई.

इस बात की पुष्टि देश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के बयान से भी होती है. जिसमे उन्होंने कहा, पुलिस को एक गाड़ी बरामद हुई है, जिसमे 5 जानवर जिन्दा मिले हैं, जबकि 1 जानवर उस गाड़ी में मृत पाया गया है. कटारिया ने बताया कि जिन्दा जानवरों को पुलिस की ओर से वहां की गोशाला में भिजवाया दिया गया है. ऐसे में स्पष्ट है कि पुलिस को वारदात के होने से पहले ही सारी जानकारी थी.

ध्यान रहे गोविंदगढ़ थाने के अंतर्गत अलवर से पिकअप में गाय लेकर भरतपुर के घाटमिका गांव जा रहे तीन मुस्लिम युवकों पर गौरक्षक दल ने हमला किया था. इस दौरान सभी के साथ जमकर मारपीट की गई. जिसमे एक युवक उमर खान की मौके पर गोली लगने से मौत हो गई. जबकि दो ताहिर और जावेद गंभीर घायल है.

इस सबंध में मेव समाज का कहना है कि हिंदूवादी संगठन के लोगों ने पुलिस के साथ मिलकर गाय ले जा रहे मुस्लिम युवकों के साथ मारपीट की और गोली मारकर हत्या कर दी. इसके साथ ही साथ युवकों के अंग-भंग भी कर दिए. और शव को रेलवे पटरी पर डाला गया है ताकि शव की शिनाख्त ना हो सके.


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