tale

मुगलों के दौर से ताले अलीगढ़ की पहचान बने हुए हैं लेकिन यहां का ताला उद्योग अब संकट में है जिसका खामियाजा इसमें काम करने वाले करीब एक लाख लोग उठा रहे हैं। नोटबंदी ने इस संकट को और गहरा दिया है। अलीगढ़ में देश के कुल ताला उत्पादन का 75 फीसदी उत्पादन होता है इसलिए शहर को ताला नगरी भी कहा जाता है। अलीगढ़ के ताले उच्च गुणवत्ता की पहचान बन चुके हैं।

और पढ़े -   जमेशदपुर: पुलिस की मौजूदगी में मस्जिद पर फेंके गए पत्थर, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

अखिल भारतीय ताला उत्पादक संघ के पूर्व अध्यक्ष तथा सपा विधायक जफर आलम ने बताया, ‘‘गैर पंजीकृत इकाईयों समेत 90 फीसदी छोटी और घरेलू इकाईयां या तो बंद हो चुकी हैं या बंद होने की कगार पर हैं।’’ उन्होंने आगे बताया, ‘‘इस नगदी आधारित कारोबार को चलाने में शहर के लगभग एक लाख लोग सक्रिय तौर पर शामिल हैं और यह सोचकर ही सिहरन आती है कि तब क्या हालात होंगे जब रोजगाररहित ये लोग उद्देश्यहीन होकर भटकेंगे।’’

और पढ़े -   2000 दलितों ने दी इस्लाम अपनाने की धमकी, हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीरों को नाले में बहाया

तालानगरी औद्योगिक विकास संगठन के महासचिव सुनील दत्त ने बताया, ‘‘उद्योग को खड़ा करने के लिए बैंक पैसा देने की स्थिति में नहीं हैं और नगदी आधारित अर्थव्यवस्था को इतने कम समय में प्लास्टिक मनी आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना संभव नहीं है।’’ तालों और तांबे के अन्य उत्पादों का निर्यात करके यह उद्योग सालाना 210 करोड़ रूपये की कमाई करता है। लगभग 6,000 घरेलू और मझौली ताला इकाईयों के साथ ताला उद्योग शहर की आर्थिक बुनियाद बनाता है।

और पढ़े -   झारखंड हत्याकांड - पुलिस के सामने ही की थी नईम की हत्या, बचाने के बजाय तमाशबीन बनी रही

लेकिन पूर्वी एशियाई देशों मसलन चीन, ताईवान और कोरिया में बनने वाले सस्ते तालों के बाजार में आने और धातु की कीमतों में दोगुना इजाफा होने से यहां का ताला उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है। (भाषा)


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE