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यूपी में समाजवाद की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली अखिलेश सरकार दिनों-दिन बेरहम होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि यह बेरहमी समाज के सिर्फ एक तबके के हिस्से में हो लेकिन ऐसा जरूर है कि एक खास तबके पर ज्यादा हो अत्याचार किया जा रहा है। वो भी उस समाज पर जो इस समाजवाद के राजनीतिक सफर का बराबर का हिस्सेदार है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में मुलायम के समाजवाद में एमवाई समीकरण ही सत्ता के करीब लाता है।

पर समाजवाद के नए पेहरूआ व नए युवातुर्क अखिलेश यादव को इस बात की ज़रा भी गौरो-फिक्र नहीं है। लगता तो यही है कि उनके प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतें पैर फैला रही है। इन सांप्रदायिक शक्तियों की जड़े उनकी सरकार औऱ महकमों में भी जमने लगी है।

इसकी बानगी एक बार नहीं हजारों बार देखने को मिली है पर नया मामला सूबे के बांदा में सामने आया है जहाँ यूपी पुलिस ने बेइंतहा बेरहमी से एक ख़ास तबके से ताल्लुक रखने वाले चार युवकों की बेवजह पिटाई की है।

मामला कुछ यूँ है कि बांदा के जसपुरा थाने में 25 नवंबर की देर रात 10 बजे घर लौट रहे चार मुस्लिम युवाओं को थानाध्यक्ष पंकज तिवारी सहित तमाम पुलिसवालों ने बेइंतहा बेरहमी से पीटा। साथ ही इलाके में हुई चोरी की घटना का इलज़ाम भी अपने सिर लेने के लिए भी पुलिस की तरफ से जोर डाला गया । (स्त्रोत)

थाने का पूरा पुलिस महकमा इन चारों को बुरी तरह पीटता रहा। इनकी गलती सिर्फ इतनी है की इन्होंने अपने नाम बता दिए। जो शासाव खां, करीम खां, सलमान खां, शोकिया व ऱासिक खां थे। (स्त्रोत- लक्ष्मण प्रसाद )

बांदा के जसपुरा थाने में बेरहमी से पीटने वाले ये चारों लोग करीब के पईलानी थाने के रहने वाले थे। बताया जा रहा है कि देर रात किसी पास के गांव से शादी निमंत्रण से लौट रहे थे। घटना के बाद बांदा पुलिस के अफसरों ने थानाध्यक्ष पंकज तिवारी सहित सभी दोषियों को निलंबित कर दिया है।

जसपुरा थाने के नए थानेदार राजीव यादव ने बोलता हिंदुस्तान से बातचीत करते हुए बताया कि 25 नवंबर की रात मारपीट वाली घटना में थानाध्यक्ष को निलंबित करते हुए बड़े अफसरों ने जांच के आदेश कर दिए है। जो दोषी होगा उसको सजा मिलेगी। फिलहाल अभी तक इसकी कोई रिपोर्ट नहीं आई है।

बोलता हिंदुस्तान के साभार से 


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