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राजस्थान के अजमेर में हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन (रह.) की दरगाह के करीब से पुलिस ने 7 रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया है. ये सभी अपनी पहचान छुपा कर रह रहे थे.

आरोपियों की पहचान उस समय हुई जब एक रोहिंग्या मुस्लिम का पत्नी से झगड़ा होने के बाद उसकी पत्नी थाने में शिकायत लेकर पहुंची. पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने उसके पति को गिरफ्तार किया. जब उससे पूछताछ की गई तो वह म्यांमार का मूल निवासी निकला.

दरगाह थाना प्रभारी मानवेन्द्र सिंह ने बताया कि पांच साल से रोहिंग्या अमानुल्ला पुत्र अब्दुल शकूर दरगाह क्षेत्र के सिलावट मोहल्ले में नूरानी मस्जिद के पास पहचान छिपाकर रह रहा था. मामला तब खुला जबकि उसका बीवी से झगड़ा हो गया. मामला थाने पहुंचा तो खुलासा हुआ कि अमानुल्ला म्यांमार का नागरिक है और यहां वह अवैध रूप से रह रहा है.

सिंह ने बताया कि वह 2009 में बर्मा के म्यांमार से कोलकाता के रास्ते भारत आया था. उसने दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त से शरणार्थी का कार्ड बनवाया था. इस कार्ड के आधार पर वह जम्मू-कश्मीर पहुंच गया और वहां पर बच्चों को मस्जिद में पढ़ाने लगा.

करीब पांच महीने वह कश्मीर में रहने के बाद 2010 में अजमेर गया और यहां दरगाह इलाके में खादिमों के बच्चों को घर और मस्जिद में तालीम देने लगा. यहां रहते हुए उसने आधार कार्ड, पेन कार्ड, विकलांग प्रमाण पत्र, इंडेन कंपनी का गैस कनेक्शन, विद्युत कनेक्शन और भारतीय नागरिकता का कार्ड बनवा लिया.


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