अहमदाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सामाजिक समानता को बढ़ावा देने के लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर की 125वीं जन्मशती मनाने की तैयारी कर रहे हैं वहीं देश में दलितों के साथ भेदभाव की खबरें लगातार आ रही हैं। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एक दलित छात्र की आत्महत्या के बाद ताजा मामला अब गुजरात का है। आरोप है कि यहां एक तीन साल के बच्चे के बाल काटने से सिर्फ इसलिए इनकार कर दिया गया क्योंकि वह दलित था।
प्रतीकात्मत तस्वीरवाकया पीएम मोदी के होमटाउन मेहसाणा से महज 8 किलोमीटर दूर कारबातिया गांव का है। मामले में वडनगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई है। मिली जानकारी के मुताबिक, नरेश परमार को उस समय जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा जब 12 जनवरी को वह अपने बेटे दीप (तीन साल) को नाई की दुकान पर ले गए। परमार का आरोप है कि पहले तो नाई ने उन्हें थोड़ी देर इंतजार करने को कहा इसके बाद दरबार समुदाय के एक शख्स की कॉल के बाद उसने बच्चे के बाल काटने से इनकार कर दिया।

परमार एक डायमंड वर्कर हैं, उन्होंने हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया,’पहले मैं अपने बच्चे को बाल कटाने के लिए वडनगर लेकर जाता था और वहां जाने में ही 50 रुपये खर्च हो जाते थे। इसलिए इस बार मैं उसे गांव में एक स्थानीय नाई की दुकान पर ले गया लेकिन उन्होंने बाल काटने से इन्कार कर दिया। दरबार सुमदाय के एक सदस्य ने नाई को धमकी दी थी कि अगर उसने मेरे बच्चे के बाल काटे तो उसे गंभीर खामियाजा भुगतना होगा। राज्य में विकास कहां हुआ है जब सभी जगहों पर बाल कटाने तक की सुविधा नहीं है?’

परमार ने इसके खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया और उन्होंने वडनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने नाई (जयेश भाई) और दरबार समुदाय के दजो सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया। दलित राइट्स ऐक्टिविस्ट्स शैलेश परमार ने बताया कि उन्होंने इस बारे में मेहसाणा के कलेक्टर से भी शिकायत की लेकिन राज्य सरकार का कोई भी शख्स गांव नहीं गया। मेहसाणा के कलेक्टर लोचन सेहरा ने कहा कि वे मामले की जांच कराएंगे। उन्होंने कहा,’मैं तालुका डिवेलपमेंट ऑफिसर को गांव में भेजूंगा और रिपोर्ट फाइल करने को कहूंगा।’ साभार: नवभारत टाइम्स


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