असम में एक बार फिर से पूर्व सैनिक के अपमान का मामला सामने आया है. 18 साल तक सेना में रहकर देश सेवा करने वाले हवालदार और और उनकी पत्नी को उसकी नागरिकता साबित करने के लिए कहा गया है.

बारपेटा जिले के विदेशी ट्राइब्यूनल ने मेहरुद्दीन अहमद और उनकी पत्नी हुस्नायरा को 16 सितंबर को नोटिस जारी कर साबित करने को कहा कि वे भारतीय है. ट्राइब्यूनल द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि दोनों बिना वैध दस्तावेजों के 25 मार्च 1971 के बाद भारत में आए.

इस बारें में अहमद ने कहा कि ‘जब आपने अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम कर दी हो, फिर ऐसा होना दुर्भाग्यपूर्ण है.’ उन्होंने कहा कि उनके परिवार में कभी किसी को ऐसा कोई नोटिस नहीं दिया गया. इससे पहले पिछले महीने सेना के एक जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर अजमल हक को भी ऐसा ही नोटिस दिया गया था.

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अजमल हक

अजमल हक को असम पुलिस ने बांग्लादेश घुसपैठिया करार देते हुए उनके खिलाफ नोटिस जारी किया था. अजमल ने 1986 में टेक्निशियन के तौर पर सेना जॉइन की थी. वे हाल ही एमे सेवानिवृत हुए थे. गुवाहटी में रह रहे अजमल का बेटा पिता की तरह फ़ौज में जाने के लिए बेइंडियन मिलिट्री कॉलेज देहरादून में पढ़ रहा है, वहीँ बेटी गुवाहाटी के नारेंगी स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल की छात्रा है.

उन्हें भी नोटिस में जिला पुलिस द्वारा उनके खिलाफ केस दर्ज करने की जानकरी दी गई है. उन पर 25 मार्च, 1971 के बाद भारत में बिना किसी दस्तावेज के घुस आने का आरोप हैं.


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