Photo Courtesy- ETV

ग्राम पंचायत ने सरकारी स्कूल में पढ़कर 12वीं कक्षा में गांव में सबसे अधिक अंक लेने वाली बेटी को एक दिन का सरपंच चुना. शीला के पिता मजदूरी करते हैं फिर भी उसने बाहरवी में इक्यासी प्रतिशत नम्बर लाए थे जिसके चलते ग्रामीणों ने उसे आजादी के पर्व पर एक दिन का सरपंच बनाया.

शीला ने पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में ही की है। इसी बात को देखते हुए पंचायत और ग्रामीणों ने सुशीला को एक दिन का सरपंच बनाने का फैसला लिया है. हालांकि निजी स्कूलों से 12वीं पास करने वाली आरती सैनी, कविता खिलेरी के सुशीला से अधिक अंक हैं, लेकिन सुशीला के सरकारी स्कूल में पढ़ते हुए भी 81 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर ग्रामीणों द्वारा सर्वसम्मति से चुना गया.

स्कूल के प्राचार्य का कहना है कि सुशीला रानी को ग्राम पंचायत ने जो सम्मान दिया है, उससे उनका गांव और स्कूल प्रदेश के मानचित्र पर आ गया है. स्कूल की अन्य छात्राएं भी अब मन लगाकर पढ़ाई करेगी ताकि वे आगे बढ़ सके. साथ ही उन्होंने सुशीला रानी की तरह स्कूल में कमरों की कमी को शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा बताया.

गांव धांसू की पंचायत की ओर से की गई पहल वाकई में एक नई शुरुआत है. इससे न केवल कन्या भ्रूण हत्या से छूटकारा पाने में सहायता मिलेगी, बल्कि लड़कियों को स्कूल से आते ही घर के काम में जुटाने वाले अभिभावकों को भी छात्राओं को पढ़ाई के लिए समय देने की प्ररेणा मिलेगी.


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