जयपुर. भारतीय खाद्य निगम के जरिए अलवर व भरतपुर के रसद अधिकारी, जिले के राशन डीलर, विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के मिलकर पिछले साल करीब 50 करोड़ रुपए के गेहूं का घोटाला करने का मुद्दा गुरुवार को विधानसभा में सांचोर के विधायक सुखराम विश्नोई ने उठाया।
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विश्नोई ने विधानसभा में पर्ची के जरिए कहा कि यह अप्रेल 2015 में भरतपुर की मण्डियों से लाए गए करीब 3.5 लाख क्विंटल गेहूं का मामला है। गेहूं भरतपुर से अलवर स्थित भारतीय खाद्य निगम के गोदाम लाया गया। वही गेहूं अलवर डीएसओ के जरिए राशन डीलरों को भेजा गया। राशन डीलरों ने बेहिसाब वितरण बता दिया। मतलब आढ़तियों ने बिना किसानों से पहचान पत्र लिए गेहूं खरीद लिया, लेकिन फर्जी किसानों के बैंक खाता नम्बर लेकर उनको पैसा ट्रांसफर कर दिया गया। इस पूरे मामले में आढ़तियों से लेकर अलवर व भरतपुर के डीएसओ व राशन डीलर शामिल हैं। यह करीब 50 करोड़ रुपए का बड़ा घोटाला है। मंत्री का खुद का जिला है।

यह मामला अखबारों में उजागर होने के बाद इसकी चार बार जांच की गई है। पहले दिल्ली की टीम ने जांच की। जिसमें पाया गया कि गेहूं कागजों में ही खरीदा गया है। दूसरी नोएडा की सतर्कता समिति ने जांच की। तीसरी जांच में भी इसे कांट छांट के रिकॉर्ड मिले। अब चौथी ऑडिट जारी है। यदि गड़बडी या घोटाला नहीं है तो दस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ र्कावाई कैसे की गई? लेकिन डीएसओ के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं की गई। केवल नोटिस दिया गया है। डीएसओ को सस्पेंड करना चाहिए।

इनके खिलाफ कार्रवाई की

मंत्री ने बताया कि मामले की शिकायत मिलने पर दिसम्बर 2015 में जांच कराई गई। जनवरी 2016 में विस्तृत जांच की गई। करीब 4 लाख 46 हजार 942 गेहूं के कट्टों की तुलाई नहीं करने की अनियमितता पर नियमानुसार एफसीआई डिपो मैनेजर अवतार मीणा, राम सिंह मीणा, मुकेश कुमार व रमेश चन्द, क्वालिटी कंट्रोल ऑफिसर महेश, सुमन यादव, अमर चन्द, राकेश कुमार व रवि कुमार और क्षेत्रीय प्रबन्धक रामबाबू मीणा व क्षेत्रीय प्रबन्धक क्वालिटी कंट्रोल बीएस सोलंकी को कारण बताओ नोटिस दिया गया। इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी है। इस मामले की पांच सदस्यीय सतर्कता समिति अलग से जांच कर रही है। इस मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी अधिकारी या कर्मचारी होंगे उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। सांचोर विधायक ने बीच में कहा कि जब मंत्री गड़बड़ी मान रहे हैं तो डीएसओ को नोटिस देने की बजाय निलम्बित किया जाना चाहिए।

4.46 लाख कट्टे नहीं तौले गए

इस पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री हेमसिंह भड़ाना ने कहा कि भारतीय खाद्य निगम एक स्वतंत्र एजेंसी है। निगम के गोदामों में जगह नहीं होने के कारण अलवर में एफसीआई के गोदाम पर गेहूं भेजा गया था। भरतपुर में कुल 1.69 लाख मैट्रिक टन गेहूं खरीदा गया, लेकिन वहां के गोदामों की क्षमता करीब 31 हजार मैट्रिक टन गेहंू की है। जिसके कारण भरतपुर से अलवर गेहूं लाया गया। अलवर के गोदाम पर 4 लाख 46 हजार 942 गेहूं के कट्टों की तुलाई नहीं की गई। एक कट्टा 50 किलो गेहूं का होता है।

राजस्थान पत्रिका ने उठाया था मुद्दा

उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका ने भी एफसीआई के गोदाम के पास कुएं व गढ्ढों में सड़ा गेहूं मिलने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उसके बाद जयपुर व दिल्ली की टीमों ने मौके पर जांच भी की थी। यह प्रकरण भी एफसीआई गोदाम के गेहूं मामला से जुड़ा है। (Patrika)


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