पिछले साल जुलाई में हिजबुल  कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद से ही कश्मीर घाटी खून से लाल है, विरोध-प्रदर्शनों का जो सिलसिला शुरू हुआ है, वो एक साल का वक्त गुजरने के बावजूद भी नहीं रुका है. इसी बीच घाटी ने दो रमजान देखे जो खून से सने रहे.

इस साल भी कश्मीर घाटी में रमजान खून से सना हुआ ही रहा. इस बार घाटी में हिंसा के दौरान कम से कम 42 लोगों को अपनी जान गई जिनमें 9 पुलिसवाले भी शामिल थे. मरने वालों में 27 आतंकी और 6 आम नागरिक भी शामिल हैं. पिछले साल भी घाटी में ईद की खुशियाँ नहीं मनी थी.

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गौरतलब रहें कि 2016 में घाटी में हिंसा के दौरान  कुल 389 लोगों की मौत हुई. इनमें से 151 आमलोग, 80 सुरक्षाबल और 158 मिलिटेंट थे. जम्मू कश्मीर में जुलाई महीने में कुल 62, अगस्त में 25, सितंबर में 20, अक्टूबर में 8, नवंबर में 17 और दिसंबर में 3 आम नागरिकों की मौत हुई.

इसके अलावा लगभग 16000 लोग घायल हुए. इनमें से 70 फीसदी पैलेट गन के शिकार हुए. जबकि 3300 सुरक्षाबल तो केवल पत्थरबाजी की घटना में घायल हो गए. वहीँ करीब 13000 लोगों को डिटेन किया गया था.

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