लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सामाजिक संगठन रिहाई मंच ने सपा सरकार के चार साल पूरे होने पर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव, हिंसा, आतंकवाद के नाम पर बेगुनाहों को फंसाने का आरोप के साथ-साथ उर्दू, अरबी और फारसी भाषा एवं अल्पसंख्यक संस्थानों से संबन्धित वादा न पूरा करने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से 41 सवाल किए हैं.

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रिहाई मंच द्वारा किए गए 41 सवाल इस प्रकार हैं :

1. उत्तर प्रदेश के जो बेक़सूर मुस्लिम नौजवान दहशतगर्दी के नाम पर जेलों में बंद हैं, उन्हें चुनावी वादे के अनुसार क्यों नहीं रिहा किया गया?

2. अदालतों द्वारा बरी हुए आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को चुनावी वादे के अनुसार पुर्नवास और मुआवज़ा क्यों नहीं दिया गया?

3. सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों के खिलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

4. मुसलमानों को 18 फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा पूरा क्यों नहीं किया गया?

5. यूपी में सांप्रदायिक हिंसा बिल लाने के लिए सरकार ने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई?

6. सच्चर, रंगनाथ और कुंडू रिपोर्ट सिफ़ारिशों पर अमल क्यों नहीं किया गया?

7. मुज़फ्फ़रनगर में सांप्रदायिक हिंसा में पीड़ित परिवारों को अखिलेश सरकार ने इंसाफ़ दिलाने का वादा पूरा क्यों नहीं किया?

8. लव जिहाद के नाम पर साम्प्रदायिक उन्माद और हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ़ सरकार ने उचित धाराओं में कारवाई क्यों नहीं की?

9. राजनैतिक विरोधियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ़ भड़काऊ भाषण द्वारा प्रदेश में अराजकता फैलाने वाले नेताओं पर कानून के मुताबिक़ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

10. प्रदेश के राज्य अल्पसंख्यक आयोग में वार्षिक रिपोर्ट तैयार नहीं होती, मामलों का कोई केस स्टडी नहीं होता. सांप्रदायिक हिंसा से ग्रस्त मुज़फ्फ़रनगर, दादरी तक में आयोग ने कोई दौरा नहीं. इसकी स्थापना के गाईडलाइन के अनुसार जनपदों में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के पदों पर तैनात अधिकारी अल्पसंख्यक नहीं हैं. सरकार की इस उदासीनता की वजह क्या है?

11. प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम के क्रम संख्या 14 व 15 में उल्लिखित है कि जो भी नौजवान दहशतगर्दी के तहत जेलों में बंद किए जाएंगे और अदालती प्रक्रिया से बरी होंगे, उन्हें पुर्नवास मुआवज़ा और सरकारी नौकरी दी जाएगी. परन्तु इस पर अमल क्यों नहीं किया गया?

12. प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्रीय कार्यक्रम के मुताबिक़ आतंकवाद के नाम पर जेलों में बंद किए गए नौजवानों को फर्जी तरीके से फंसाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई उन्हीं धाराओं के तहत किए जाने की बात के बावजूद ऐसे मामलों में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

13. मुसलमानों के अंदर आत्मविश्वास पैदा करने के लिए राजकीय सुरक्षा बलों में मुसलमानों की भर्ती का विशेष प्रावधान करने और कैम्प आयोजित करने का वादा पूरा क्यों नहीं किया गया?

14. सभी सरकारी कमीशनों, बोर्डों और कमेटियों में कम से कम एक अल्पसंख्यक प्रतिनिधि को सदस्य नियुक्त करने के सरकार के वादे का क्या हुआ?

15. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 से अखिलेश सरकार ने 3 दिसंबर 2015 को सूचना अधिकार नियमावली 2015 से उर्दू भाषा में आवेदन/अपील देने पर पाबंदी क्यों लगाई?

16. बुनकरों की क़र्ज़ माफी क्यों नहीं?

17. किसानों की तरह गरीब बुनकरों को मुफ्त बिजली देने के वादे का क्या हुआ?

18. जिन औद्योगिक क्षेत्रों में अल्पसंख्यकों की बहुलता है, जैसे हथकरघा, हस्तकला, हैण्डलूम, कालीन उद्योग, चूड़ी, ताला, जरी, जरदोजी, बीड़ी, कैंची उद्योग उन्हें राज्य द्वारा सहायता देकर प्रोत्साहित करने, करघों पर बिजली के बकाया बिलों पर लगने वाले दंड और ब्याज को माफ़ कर बुनकरों को राहत देने, छोटे और कुटीर उद्योगों में कुशल कारीगरों की कमी को पूरा करने के लिए प्रत्येक विकास खंड स्तर पर एक-एक आईटीआई की स्थापना करने का वादा पूरा क्यों नहीं हुआ?

19. यूपी के अल्पसंख्यक बहुल्य जिलों में संचालित मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्लान के तहत संचालित अधिकांश योजनाएं अपूर्ण क्यों हैं?

20. 20 अगस्त 2013 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदाय को उनका वाजिब हक़ दिलाने के लिए अल्पसंख्यकों को 30 विभिन्न विभागों में संचालित 85 योजनाओं में 20 प्रतिशत मात्राकृत लाभान्वित किए जाने का जो वादा किया था, उसे क्यों नहीं पूरा किया गया?

21. 25 अक्टूबर 2013 की घोषणा के अनुसार स्वर्ण जयंती शहरी रोज़गार योजना के अन्तर्गत मुस्लिमों को 20 प्रतिशत लाभान्वित किया जाना था, जिसमें से स्वर्ण जयंती शहरी योजना अंतर्गत 6 उपयोजनाएं संचालित तो हुई परन्तु 31 मार्च 2014 को समाप्त कर दी गई. इस मद के लिए जो पैसा था वह कहां खर्च हुआ?

22. उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा मानने के बावजूद अखिलेश सरकार के कार्यकाल में सरकारी कामकाज में महत्वपूर्ण सरकारी नियमों, विनियमों, सरकारी आदेशों समेत गज़ट का रुपान्तर उर्दू भाषा में क्यों नहीं?

23. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ की प्रथम परिनियमावली में उर्दू/अरबी/फारसी के अंक अन्य विषयों की तरह अंक-पत्र में न जोड़े जाने के निर्णय से उक्त विश्वविद्यालय के स्थापना के मक़सद को ही ख़त्म कर दिया गया. ऐसा क्यों किया गया?

24. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ की प्रथम परिनियमावली में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति में उर्दू की अनिवार्यता को क्यों समाप्त कर दिया गया?

25. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ में एक भी नई फैकल्टी क्यों नहीं खोली गई?

26. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ से मदरसों को जोड़ने के बजाए उसे मदरसों से दूर क्यों किया गया?

27. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ के कुलपति, रजिस्ट्रार, प्रॉक्टर, ओएसडी, फाइनेंसर कोई भी उर्दू भाषा का सनद प्राप्त क्यों नहीं है?

28. ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय लखनऊ की प्रथम परिनियमावली उर्दू भाषा में क्यों नहीं?

29. रफीकुल मुल्क मुलायम सिंह यादव आईएएस उर्दू स्टडी सेंटर में मात्र 50 सीट जबकि प्रदेश में 75 जिले. पढ़ाई का माध्यम उर्दू भाषा नहीं और कोई पद स्थाई नहीं, आखिर ऐसा क्यों?

30. उर्दू की प्रोन्नति के लिए मुस्लिम बहुल इलाकों में प्राईमरी, मिडिल व हाई स्कूल स्तर पर सरकारी उर्दू मीडियम स्कूलों की स्थापना क्यों नहीं की गई?

31. अखिलेश सरकार के कार्यकाल में यूपी में एक भी यूनानी मेडिकल कालेज की स्थापना क्यों नहीं की गई?

32. यूपी के 54 जिलों में 253 यूनानी चिकित्सालयों में नर्स और फार्मेसिस्ट की नियुक्ति किसी भी संस्थान में क्यों नहीं?

33. यूनानी चिकित्सा पैथी जिसका कोर्स उर्दू भाषा में है, उसके नर्स और फारमेसिस्ट के कोर्स से उर्दू को क्यों बाहर किया?

34. यूनानी चिकित्सा पैथी की 2008 से आज तक कोई भी नियमावली व स्थाई निदेशक क्यों नहीं?

35. मुसलमानों के वह शैक्षिक संस्थान जो विश्वविद्यालय की शर्तों पर पूरे उतरते हैं, उन्हें कानून के तहत युनिवर्सिटी का दर्जा देने का वादा पूरा क्यों नहीं किया गया?

36. अखिलेश सरकार ने आर्थिक सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से अधिक पिछ़ड़ा मानते हुए दलितों की तरह दलित मुस्लिमों को जनसंख्या के आधार पर अलग से आरक्षण क्यों नहीं दिया?

37. सपा सरकार द्वारा बनाए गए मुहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की सभी कानूनी बाधाएं समाप्त करने की बात तो की गई थी, लेकिन क्या अच्छा होता कि इस विश्वविद्यालय को सरकारी विश्वविद्यालय के रुप में बनाया गया होता. क्योंकि जो यह विश्वविद्यालय भी डोनेशन की बुनियाद पर ही प्रवेश देता है, जिससे गरीब जनता को सीधा लाभ नहीं पहुंच रहा है. उक्त क्षेत्र में प्राईवेट कई विश्वविद्यालय मौजूद हैं. जबकि बरेली से लेकर मेरठ तक 200 किमी के परिक्षेत्र में एक भी सरकारी विश्वविद्यालय नहीं है. सरकार ने उक्त क्षेत्र में कोई सरकारी विश्वविद्यालय क्यों नहीं बनवाया जिससे जनता को सीधा लाभ पहुंचता?

38. मुस्लिम बहुल जिलों में नए सरकारी शैक्षिक संस्थानों की स्थापना क्यों नहीं की गई?

39. क़ब्रिस्तानों की भूमि पर अवैध क़ब्जे को रोकने व भूमि की सुरक्षा के लिए चहार-दिवारी के निर्माण पर कार्य क्यों नहीं किया गया?

40. दरगाहों के सरंक्षण व विकास हेतु दरगाह ऐक्ट का वादा क्यों पूरा नहीं किया और स्पेशल पैकेज के वादे का क्या हुआ?

41. वक्फ़ डाटा कम्प्यूटरीकृत स्कीम के तहत आज तक वक्फ़ के सारे डाटा कम्प्यूटरीकृत क्यों नहीं किए गए?


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