बात 1943 की है. जब अल्जीरिया को फ्रांस से आजादी मिली थी. इस 128 साल के गुलामी के शासन में फ्रांस ने अल्जीरिया के जवानों में इस्लामी भावना को खत्म करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की थी.

उन्ही कोशिशों में से एक ये थी कि फ्रांस ने अल्जीरिया से 10 लड़कियों चुना और उन्हें फ्रांस में ले जाकर शिक्षा देना शुरू किया और उन्हें फ्रांस की तौर-तरीके और शिष्टाचार सिखाये गए जिसके बाद वे धीरे धीरे वह फ्रांस की नागरिक की तरह जीवन बिताने लगीं.

जब 11 साल एक लम्बा अरसा गुजर गया तो उनकी शिक्षा की समाप्ति पर एक समारोह आयोजित किया गया जिसमें मंत्रियों और रिपोर्टर को आमंत्रित किया गया था. इन लड़कियों के बैठक में प्रवेश होते ही सब चुप हो गए, 11 साल के प्रयास के बाद भी यह लड़कियां इस्लामी हिजाब के साथ समारोह में शरीक हुईं.

बैठक में शरीक अधिकारियों को गुस्सा आ गया, और रिपोर्टर फ़्रानसीसी साम्राज्यवाद के मंत्री रॉबर्ट लाकोस्ट की ओर भागे और पूछा, अगर फ्रांस की सरकार 11 साल में इन लड़कियों का हिजाब नहीं उतार सकी तो 120 साल में हमने क्या किया है? लाकोस्ट ने कहा, मैं क्या कह सकता हूँ, जब कुरान फ्रांस सरकार से अधिक मजबूत है.


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