फेसबुक दुनियाभर में ये प्रचार कर रहा है की वो गरीबो और उन लोगो का internet की पहुँच बनाएगा जहाँ अभी तक internet नही पहुंचा है ये सबके लिए फ्री होगा तथा इसमें उन लोगो का फायदा होगा जो क्रिएटिव थोड़ा हटकर सोचने वाले है, जैसे की अपने विज्ञापन में मुश्ताक और मेहतर का उदहारण देते हुए फेसबुक कहता है की इन दोनों ने मिलकर ‘विंड मील’ ( हवा से पानी निकालने का यंत्र) बना लिया सोचो अगर इनके पास internet होता तो ये क्या क्या बनाते?’

फेसबुक की इस दलील का हम स्वागत करते है लेकिन मुश्ताक और मेहतर internet की मदद से अगर कुछ और बनाते तो उन्हें किसी वेबसाइट पर जाना पड़ता लेकिन  internet.org में फेसबुक और एक-दो वेबसाइट के अलावा दूसरी वेबसाइट फ्री नही है तो फिर मेहतर और मुश्ताक को दूसरी वेबसाइट पर जाने के लिए उस वेबसाइट का रिचार्ज कराना पड़ता इसका सीधा सा मतलब हुआ फेसबुक ऐसे लोगो से भी पैसा वसूल कर लेता जिन्होंने बिना internet पर जाए विंड मील बना ली.

उदहारण के लिए अपने अपनी फेसबुक वाल ओपन की जो चीज़े आप अपनी वाल पर देखते है वो इस प्रकार है, लेख,फोटो,विडियो,दूसरी वेबसाइट के लिंक, इसमें सिर्फ वही चीज़े फ्री होंगी जो फेसबुक के सर्वर पर अपलोड की गयी है, मसलन के तौर पर किसी ने खबर अपडेट की ( उदहारण) “पूर्व राष्टपति अब्दुल कलाम का निधन” और उसने ये लिंक किसी न्यूज़ वेबसाइट से लिया और शेयर कर दिया लेकिन जैसे ही आप इस लिंक पर क्लिक करके इस खबर को पढना चाहेंगे वैसे ही फेसबुक पर रिचार्ज करने का आप्शन दिखा देगा,की पहले इस वेबसाइट का रिचार्ज करो तब आपको एक्सेस मिलेगा सिर्फ वही चीज़े फ्री होंगी जो फेसबुक के सर्वर पर है.

सुनो मार्क जुकरबर्ग अगर भारतीयों से हमदर्दी है तथा डिजिटल इंडिया का समर्थन करते हो..!!!

अब मैं आपको एक ऐसी बात बताने जा रहा हु जो आप सबके सामने है लेकिन शायद आपने नोट नही की होगी 

पिछले 5 वर्षो में यदि किसी देश में सबसे अधिक ऑनलाइन बिज़नस शुरू हुए है तो वह देश है भारत, फ्लिप्कार्ट,ओयो रूम,jabong,Myntra,snapdeal,shopclues, जैसे सेकड़ो वेबसाइट है जो पिछले 5-8 वर्षो में शुरू हुए और दुनिया भर में अपनी धाक जमा ली, इसी तरह रोजाना भारत से नए बिज़नस शुरू किये जा रहे है और टेक्नोलॉजी के ज़माने में सबसे उचित माध्यम ऑनलाइन मार्केटिंग है,टेक्नोलॉजी ने उन लोगो के लिए भी रस्ते खोल दिए है जो शून्य इन्वेस्ट पर अपना बिज़नस शुरू कर सकते है, हमने ऐसी काफी कहानियां पढ़ी है जिसमे एक हॉस्टल के कमरे से आरंभ हुआ बिज़नस का टर्न ओवर करोड़ो रुपए का हो गया.

अब कोई भी नया बिज़नस शुरू करने के लिए उसकी ऑनलाइन मार्केटिंग की ज़रुरत होती है जिसके लिए पहली पसंद गूगल एडवर्ड तथा फेसबुक advertisement प्रोग्राम है, google का अपना अलग पेड सिस्टम है जो की काफी महंगा पड़ता है लेकिन सोशल मीडिया पर कोई भी मुफ्त में अपना प्रमोशन कर सकता है जैसे की फेसबुक पेज बनाकर उसके लाइक बढ़ाकर.शायद आप लोगो ने इस बात को नोट किया होगा की अगर अपने 50 पेज लाइक किये हुए है लेकिन आपकी वाल पर सिर्फ एक या दो पेज का नोटीफिकेशन आता है अगर नोट नही किया तो अभी कीजिये क्यूंकि ये जाना बहुत ज़रूरी हो गया है की फेसबुक ने कितनी होशियारी से भारतीय बिज़नस को पीछे करने का तरीका खोज लिया.

कैसे की फेसबुक ने ये चालाकी

फेसबुक जैसे ही सबसे अधिक शक्तिशाली सोशल मीडिया के रूप में स्थापित हुआ तो फेसबुक ने सबसे पहला काम वो भारतीय पेजों की REACH ( ये शब्द फेसबुक, पेजों के लिए इस्तेमाल करता है जिसमे वो ये बताता है की किस पोस्ट को कितने लोगो तक पहुँचाया गया ) कम कर दी यहाँ तक की रीच घटाकर 10 प्रतिशत कर दी जिसका मतलब हुआ की अलग किसी पेज पर 1 लाख लाइक है तो उसकी पोस्ट मात्र 10 हजार लोगो तक पहुंचेगी और अगर उन 10 हजार लोगो ने भी पोस्ट पर लाइक या शेयर नही किया तो धीरे धीरे पेज की कुल रीच खत्म कर दी जाएगी , अब अगर आपको अपनी पोस्ट को उन लोगो तक पहुंचाना है जिन लोगो ने आपका पेज लाइक किया है तो उसके लिए फेसबुक को पैसे दो , तक़रीबन 1000 RS में 1 लाख लोगो तक आपकी खबर पहुँच जाएगी,

लेकिन कोई भी पेज दिन भर में मात्र एक ही पोस्ट नही करता औसतन 10-20 पोस्ट करता है और अगर हर पोस्ट को अधिक लोगो तक पहुंचाना है तो फेसबुक को रोजाना 10-20 हजार रुपए चुकाओ

ये तब का हाल है जब फेसबुक की प्रतिस्पर्धा में ट्विटर और गूगल जैसी कंपनियां खड़ी है अब ज़रा सोचो तब क्या हाल होगा जब internet.org के ज़रिये सिर्फ एक ही कंपनी होगी.

और एक ज़रूरी बात – इस समय दुनियाभर में भारतीय ऑनलाइन कंपनियों की तूती बोल रही है और आने वाले समय में भारत ऑनलाइन  बिज़नस पर कब्ज़ा जमा सकता है इस समय internet.org का समर्थन करने से ना सिर्फ अपना नुक्सान होगा बल्की भारत के विकास पर बहुत अधिक फर्क पड़ेगा.

बात बहुत लम्बी हो जाएगी इसलिए में सिर्फ पॉइंट्स में बता देता हूँ की internet.org से क्या क्या नुकसान हो सकते है

  • ऑनलाइन नया बिज़नस शुरू करना लगभग असंभव हो जायेगा.
  • नयी वेबसाइट बनाना बेकार हो जायेगा, क्यूंकि ना तो यूजर को आपकी वेबसाइट के बारे में पता चलेगा ना ही वो किसी नयी वेबसाइट के लिए रिचार्ज करायेंगे.
  • भारत के बंगलौर, चंडीगढ़,दिल्ली जैसी जगहों पर वेबसाइट डेवलपमेंट कंपनियां बंद हो जाएँगी,क्यूंकि वेबसाइट रन करना और उसके लिए यूजर ढूढना बहुत अधिक सरदर्द का काम हो जायेगा
  • इन्टनेट के नाम पर सिर्फ फेसबुक और एक दो फ्री वेबसाइट मिलेंगी, जिससे देश में छात्रो के भविष्य पर असर पड़ेगा
  • गूगल से जानकारी निकालना काफी मंहगा हो जायेगा , क्यूंकि अगर गूगल फ्री भी मिल जाये तो वेबसाइट पर जाने के लिए रिचार्ज कराना पड़ेगा.
  • यूजर पर फुल कण्ट्रोल फेसबुक का हो जायेगा,आप क्या देखे क्या नही वो फेसबुक तय करेगा ( जैसा की मैंने अभी रीच के उदाहरण से समझाया )

बाकी बहुत सी ऐसी बातें है जो अगर लिखने बैठू तो फेहरिस्त काफी लम्बी हो जाये,मात्र इतना सोच लीजिये जो कंपनी आपको किसी पेज की पोस्ट दिखाने का पैसा ले रही है वो आपको इन्टरनेट क्यों फ्री देगी ??


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