‘आतंकवाद को डील करने के मामले देश में सबसे बदनाम एजेंसी दिल्ली की स्पेशल सेल बनकर उभरी है.’ इन बातों का इज़हार संभल में आसिफ़ नाम के युवक को अल-क़ायदा के सरगना बताने के बाद फ़र्ज़ी आतंक के नाम पर फंसाए गए युवकों की रिहाई के लिए बनी तंज़ीम ‘पीपल्स कैम्पेन अगेंस्ट पॉलिटक्स ऑफ टेरर’ (पीसीपीटी) के संस्थापक सदस्य अमीक़ जामई ने आज अपने एक प्रेस बयान में कहा है.

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उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में आज़मगढ़ के बाद अब संभल को आतंक के मॉडल के रूप में पेश किया जा रहा है, जो की बेहद ख़तरनाक है. मीडिया ट्रायल के ज़रिये खुद को हीरो बनाकर मेडल की चाहते रखने वाले एजेन्सी के अधिकारियों को सबसे पहले क़सूरवार लोगों की पूरी जानकारी जुटाकर फिर गिरफ्तार करना चाहिए. ताकि पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत से उन्हें सज़ा दिलवाई जा सके.’

अपने बयान में वह आगे कहते हैं, ‘लेकिन दिल्ली के स्पेशल सेल का रिकॉर्ड कोर्ट में बहुत बदनाम है. अधिकतर मामलों में यह कोर्ट में सही सबूत ही पेश नहीं कर पाए. लेकिन इनकी इस हरकत की वजह से बेगुनाहों को 20-20 साल जेल में गुज़ारना पड़ा है.’

अमीक़ जामई का सवाल है कि किसी भी शख्स को देश का सबसे ख़तरनाक आतंकी बनाकर यह पेश करते हैं. लेकिन अदालत उन्हें बेक़सूर बताकर छोड़ देती है. ऐसे मामलों में ऐसा क्यों न हो कि कोर्ट और संसद के प्रति अफ़सरों की ज़िम्मेदारी तय की जाये? ऐसा क्यों न हो कि स्पेशल सेल के अफ़सरों के मेडल और अवार्ड उनसे वापस ले लिए जाएं?

संभल के मामले में जामई का कहना है कि संभल से आसिफ़ के परिवार ने उनसे संपर्क किया है. वह बता रहे हैं कि आसिफ़ दिल्ली से कपड़े खरीदकर संभल में बेचने का काम करता है और घर में उनके खाने तक को नहीं है. उन्होंने कहा कि यह इल्ज़ाम सरासर ग़लत है कि उसने कई मुल्कों का सफ़र किया है. घरवालों के मुताबिक़ वह एक साल के लिए सऊदी अरब जाकर रहा है. और यदि आसिफ़ तब्लीग़ से जुड़ा रहा है, तो क्या दीन का काम करना जुर्म है?

अमीक़ जामई ने इल्ज़ाम लगाया है, ‘जब मोदी सरकार की थू थू हो रही है, सरकार फेल हो रही है, जनता के सामने उनकी साख गिर रही है तो स्पेशल सेल आतंक की राजनीति कर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. साभार: twocircles


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