सारण [संजय कुमार ओझा]। ‘छपरा काम करो ऐसा कि पहचान बन जाए, हर कदम ऐसे चलो कि निशान बन जाए।’ इसे साकार किया है छपरा की एक प्रधानाध्यापिका तत्हीर फातिमा ने। उसने हफ्ते भर से जारी निकाह की रस्मों के बीच एक दिन भी स्कूल जाना नहीं छोड़ा। यहां तक कि निकाह व विदाई के दिन भी स्कूल पहुंची और बच्चों को पढ़ाया।

सैय्यद मोहम्मद ईमाम और शमां आरा की पुत्री तत्हीर फातिमा सारण जिले के लहलादपुर प्रखंड के प्राथमिक विधालय लशकरीपुर उर्दू में प्रधनाध्यापिका हैं। उनका निकाह आलमगंज पटना सिटी निवासी सैैय्यद मूसा अली रिजवी के पुत्र जफर अली रिजवी से तय हुआ।

परिवार में जश्न का माहौल था। परिजन निकाह की तैयारियों में जुटे थे। सभी को शाम के वक्त शहनाई के साथ निकाह के कबूलनामे का इंतजार था। लेकिन, जश्न के इस अवसर पर भी तत्हीर ने विद्यालय से छुïट्टी नहीं ली।

बकौल तत्हीर, निकाह के लिए लंबी छुटी पर जाना उन्हें पंसद नहीं था। उसका प्रथम कर्तव्य बच्चों को तालीम देना है। कहती हैं कि वे कुछ अलग नहीं ंकर रही हैं। सरकार ने उन्हें इसी काम के लिए नियुक्त किया है, जिसे वे बखूबी निभाना चाहती हैं।

बन गईं मिसाल

अपने कार्य के प्रति समर्पण की वजह से भले ही तत्हीर को लगता है कि उन्होंने कुछ विशेष किया है, लेकिन आज के परिवेश में वे मिसाल बन गई हैं। निकाह के पांच दिनों पूर्व से प्रारम्भ हलदी, रतजगा, मेंहंदी आदि की रस्मों के बीच निकाह के दिन भी बच्चों को पढ़ाने की प्रशंसा पूरे इलाके में हो रही है।

विदाई के दिन भी पढ़ाया

निकाह ही नहीं, तत्हीर ने निकाह के अगले दिन भी स्कूल में पढ़ाया। ससुराल जाने के दिन भी तत्हीर रोज की भांति स्कूल पहुंचीं, बच्चों की उपस्थिति बनाई और क्लास ली। उसके बाद घर पहुंची, तब विदाई की रस्म पूरी हुई।

बच्चों को है भावनात्मक लगाव

स्कूल के बच्चे तत्हीर से भावनात्मक लगाव महसूस करते हैं। छात्र पिंटू कुमार, कुनाल कुमार, काजल कुमारी, खूशबु तारा आदि ने बताया कि मैडम जब तक वापस नहीं आ जातीं, सबको उनकी कमी खलेगी।

बोले अधिकारी

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कमरूद्दीन अंसारी ने भी तत्हीर की प्रशंसा करते हुए उसे सम्मानित करने की घोषणा की है। जिला शिक्षा पदाधिकारी चन्द्रकिशोर प्रसाद ने कहा कि तत्हीर का कार्य प्रशंसनीय और अन्य शिक्षकों के लिए अनुकरणीय है। (jagran.com)


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