लखनऊ के सेंट जोसफ इंटर कॉलेज ने कक्षा 9 की एक छात्रा फ़रहीन फातिमा को क्लास में बैठने से मना कर दिया क्योंकि वो स्कूल यूनिफार्म के साथ हिजाब पहन कर गई थी.

दुखी फ़रहीन ने अब इस स्कूल में पढ़ने से मना कर दिया है.

स्कूल की प्रिंसिपल एन. इमैनुएल ने कहा, “स्कूल का अपना ड्रेस कोड है और उसके अनुसार धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए. हम बच्चों को छात्र की दृष्टि से देखते हैं, धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं.”

प्रिंसिपल इमैनुएल ने ये भी बताया कि स्कूल मिशनरी नहीं बल्कि एक अग्रवाल परिवार चलाता है.

‘पहले नहीं बताया’

प्रिंसिपल का कहना है कि फ़रहीन और उसके अभिभावकों को पहले ही स्कूल के ड्रेस कोड के बारे में आगाह कर दिया गया था.

लेकिन फ़रहीन और उसकी माँ ने इस बात को गलत बताया.

फ़रहीन की माँ वकार फातिमा ने कहा, “एडमिशन की पूरी प्रक्रिया के दौरान ये (फ़रहीन) स्कार्फ़ लगाए रही और एडमिशन फॉर्म में जो फोटो है उसमे भी वो स्कार्फ़ पहने है. किसी ने नहीं कहा कि यहां हिजाब पहन कर क्लास में नहीं बैठ सकते हैं”.

फ़रहीन ने बताया कि 6 मई को उसका एडमिशन हुआ और 7 मई को जब वो स्कूल गई तो उसे क्लास में जाने से रोक दिया गया.

उस दिन उसका सारा वक़्त लाइब्रेरी में गुज़रा. 8 मई को भी यही हुआ लेकिन इस बार उसे अपने अभिभावकों को फ़ोन करके बुलाने के लिए कहा गया.

माँ-बाप पहुँचने पर उनको बताया गया कि फ़रहीन क्लास में बिना हिजाब के ही बैठ सकती है.

11 मई को अभिभावकों ने एक दरख्वास्त देकर हिजाब पहन कर फ़रहीन को क्लास में बैठने देने की अनुमति मांगी, जिसका स्कूल ने कोई जवाब नहीं दिया.

हिजाब और बच्चे

वकार फातिमा ने बताया कि प्रिंसिपल ने इस ड्रेस कोड के बारे में लिख कर देने से मना कर दिया.

शिकायत सुनकर उत्तर प्रदेश बाल अधिकार रक्षा आयोग की सदस्य नाहिद लारी खान आज स्कूल पहुँची और फ़रहीन के क्लास में जाकर छात्र-छात्राओं से पूछा कि क्या फ़रहीन के स्कार्फ़ या हिजाब पहनने से उनको लगता है कि भेदभाव हो रहा है.

नाहिद के मुताबिक सभी बच्चों ने भेदभाव महसूस करने से इंकार किया.

उन्होंने कहा,”कई लड़कियां हिजाब पहनना चाहती हैं लेकिन स्कूल उनके साथ धर्म के आधार पर भेदभाव कर रहा है. स्कार्फ़ या हिजाब पर रोक लगा कर बच्चों में भेदभाव की भावना पैदा की जा रही है.”

‘स्कूल लिखित माफी मांगे’

फ़िलहाल आयोग की तरफ़ से फ़रहीन का एडमिशन दूसरे स्कूल में करवाया जा रहा है.

लेकिन आयोग ने स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ सख्त कार्यवाई की सिफारिश की है.

साथ ही स्कूल के अधिकारियों से कहा है कि फ़रहीन से लिखित माफी मांगें.

लखनऊ के जिलाधिकारी राज शेखर ने अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट और जिला विद्यालय निरीक्षक को मामले की जांच कर 19 मई तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा है.


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