आरएसएस देश में इस वक्त सबसे बड़ा एनजीओ, जो विदेशी फंड से चलता है और बॉबी जिंदल अमेरिका दखल करने का ग्लोबल हिंदुत्व का दांव।

हजारों की तादाद में एऩजीओ के लाइसेंस कैंसिल किये जा रहे हैं। किन गैर सरकारी संगठनों के लाइसेंस रद्द किये जा रहे हैं, क्या वजहें हैं, इसकी न कोई सूची है और न कोई ब्यौरा है। जबकि सबसे बड़ा सच है कि देश में विदेशी वित्त पोषित जबसे बड़ा एनजीओ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ है, जिसका एक मात्र एजेंडा विधर्मी मुक्त अखंड हिंदू राष्ट्र की वैश्विक मनुस्मृति व्यवस्था का निर्माण है। इस जनविध्वंसी एजेंडे के लिए मिल रहे वैश्विक चंदे में रक्षा सौदों का कमीशन जो है सो है, अबाध विदेशी पूंजी और एफडीआई भी है।

संपूर्ण निजीकरण, संपूर्ण विनिवेश का यह मेकिंग इन आरएसएस का मूसलाधार कारोबार है।

अमेरिका को भी सीआईए, नाटो और अंतरिक्ष तक के वर्चस्व के बाद मालूम नहीं है कि मध्यपूर्व और उससे भी पहले वियतनाम में हुई सैन्य पराजय से भी भय़ंकर परिणति अमेरिकी साम्राज्य की होने जा रही है कि उसने ग्लोबल हिंदुत्व और इजराइल के बूस्टर से अपनी शैतानी विश्व व्यवस्था को मजबूत करने का आत्मध्वंसी विकल्प चुनकर अमेरिकी स्वतंतत्रता के इतिहास और रंगभेद और गुलामी के विरुद्ध अमेरिका के महासंग्राम को मनुस्मृति में निष्णात कर देने का आत्मघात करके मनुष्यता, सभ्यता और समूची कायनात को तेल कुंओं की आग में झोंक दिया है।

बाराक हुसैन ओबामा ने अपने प्रशासन में जायनी और हिंदुत्व का जो रसायन तैयार किया है, उसके नतीजे बतौर रंगभेद की आंच व्हाइट हाउस तक पहुंचने लगी है और मिस्टर प्रेसीडंट और मिसेज फर्स्ट लेडी का गुलामी का अतीत उन्हें अब बेतरह कुरेदना लगा है जो भारतीय उपमहाद्वीप में अखंड हिंदू राष्ट्र का अखंड रंगभेदी असम अन्यायपूर्ण सामाजिक यथार्थ है, हिंदुत्व का नर्क है।

अब अमेरिका ने गुजरात दंगोंके महायुद्धअपराधी को क्लीन चिट देकर समूची वैश्विक व्यवस्था हिंदू साम्राज्यवाद को हस्तांतरित करने का बंदोबस्त भी कर दिया है।

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रिपब्लिकन पार्टी के प्रेसीडेंट प्राथी की दौड़ में बाबी जिंदल का मजबूत दांव ग्लोबल हिंदुत्व का महाविस्फोट है। जिंदल हारे या जीते, फर्क नहीं पड़ता, लेकिन अमेरिका के रोम-रोम में हिंदुत्व का जहर फैलने लगा है।

विडंबना है कि हिंदू साम्राज्यवाद के एजंडे से वाकिफ अमेरिका इस्लाम का नामोनिशां मिटाने के लिए इजराइल के साथ हिंदू साम्राज्यवादियों का पार्टनर बनकर आरएसएस को ही मजबूत कर रहा है।

विश्व बैंक औऱ अमेरिकी वित्तीय संस्थानों से पोषित जो एनजीओ संसार है, जो संजोग से जनसंगठनों और जनांदोलनों का एकमात्र पर्याय बन गया है भारत में, उसे भी हिंदुत्व का बवंडर खत्म कर रहा है।

तमाम एनजीओ की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करके उनके लाइसेंस को खत्म करने के फासिज्म के राजकाज की नैतिकता हाल में हो रहे भ्रष्टाचार के महाविस्फोट में हम संघी अलमारी से निकल रहे नरकंकालों के हुजूम से जगजाहिर है और वैदिकी सभ्यता की विशुद्धता का खुलासा विदेशी पूंजी के साथ साथ भगोड़ों और आर्थिक अपराधियों के निर्लज्ज बचाव से हो रहा है।

इसी सिलसिले में पेश है यह रपटः

SHORT TAKE

An unnoticed fact: the RSS, India’s biggest NGO, gets foreign funding too

In 2002, a citizens’ report documented how a US-based charity was funneling funds to Sangh entities in India.

http://scroll.in/article/667071/an-unnoticed-fact-the-rss-indias-biggest-ngo-receives-foreign-funding-too

पलाश विश्वास


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