काफी दिनों से सोशल मीडिया और व्हाट्सएप्प पर काबा शरीफ़ को लेकर एक सन्देश प्रसारित किया जा रहा है की नाईजीरिया,केन्या,सेनेगल,ट्यूनीशिया( अलग अलग जगह अलग नाम लिए जा रहे है)   में लोगो ने अपना काबा बना लिया है और उसका तवाफ़ कर हज की रस्म को पूरा किया जा रहा है|

क्या सन्देश प्रसारित किया जा रहा है ?

मेसेज में काबा शरीफ़ के कुछ फोटोग्राफ दिखाए गये है जिनमे एक काबा-नुमा ईमारत दिखायी दे रही है तथा इस ईमारत को बिलकुल कआबे शरीफ़ के गिलाफ़ के जैसे दिखने वाले कपडे से ढाका गया है साथ कुछ लोग एहराम (हज पर पहने जाने वाला लिबास) पहने उस काबे जैसी ईमारत के चारों तरफ घूम रहे है जिसे सन्देश में कहा जा रहा है की नाईजीरिया लोगो ने अपना खुद का कआबे तामीर कर लिया है और वो लोग हज के फर्ज़ को वहीँ अदा कर रहे है तथा सन्देश में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है की इस खबर को दुनिया के सभी मुसलमान लोगो तक पहुँचाओ, जब मुझे ये सन्देश मिला तब मैंने सोचा की आखिर ये मामला क्या है तथा जो सच सामने निकलकर आया वो कुछ और ही था. फोटो देखे –

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क्या है इस काबे का सच

जब इसकी तहकीकात करते हुए मैंने अफ्रीकन देशों के न्यूज़ पेपर खंगालना शुरू किये तो हमें कुछ और ही मामला नज़र आया दरअसल अधिकतर लोग अंग्रेजी और अरबी भाषा को बोलना लिखना नही जानते जिसके कारण उन्हें हज करने के तौर तरीके जानने में बहुत परेशानी होती है तथा जब ये लोग हज करने के लिए मक्का शरीफ जाते है तो दुसरे हाजियों की देखा देखि शुरू कर देते है, इस परेशानी की लगातार शिकायत वहां के धर्म गुरुओं के पास जा रही थी जिसे देखते हुए वहां के धर्मगुरुओं ने फैसला लिया की इन लोगो को असल में मक्का भेजने से पहले हज का डेमो करवाना चाहिए जिससे असल हज में इन्हें परेशानी का सामना ना करना पड़े |

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कासिम शेख मोहम्मद नूर उस टीम का हिस्सा रहे है जिन्होंने हज का मॉडल तैयार करवाया,

कासिम के अनुसार “हमने जब इस बात पर गौर किया की सोमालिया से जाने वाले अधिकतर लोगो के हज करने के तौर तरीके मालूम नही है और मक्का जाकर ये लोग गलत तरह से हज करते है तो हम लोगो ने ये निर्णय लिया की असल हज पर जाने से पहले इन लोगो को ट्रेनिंग देने के लिए एक डेमो तैयार करवाया जाये तथा ठीक उसी तरह से सिखाया जाये जैसे असल हज में किया जाता है”

शेख आगे कहते है की जो लोग बहुत अधिक पैसा खर्च करके हज करने जाते थे तथा उनका परिवार भी उनके साथ होता था हमेशा उन लोगो की शिकायत रहती इस डेमोनस्ट्राशन की ट्रेनिंग के पश्चात इस तरह की शिकायतें बहुत कम हो गयी है

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तो ये है असल कहानी हज के उस मॉडल की जो कथित केन्या,नाईजीरिया या सेनेगल में बनाया गया है जिसका मुख्य उद्देश असल हज की ट्रेनिंग मुहैया कराना है ना की हज करवाना,इसी तरह हज का एक मॉडल सोमालिया की राजधानी मोगादेशु में भी बनाया गया है

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नाईजीरिया का हज ट्रेनिंग कैंप
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ईरान का हज ट्रेनिंग प्रोग्राम
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ट्यूनीशिया का हज ट्रेनिंग कैंप

अगर आपको भी लगता है की सोशल मीडिया का दरुपयोग हो रहा है तो हमसे इस ईमेल आई डी [email protected] पर संपर्क कर सकते है तथा ध्यान रहे कुछ भी शेयर करने से पहले तथ्यों को ज़रूर जांच ले|

Reference –

MOCK HAJJ EXERCISE IN LAGOS.

www.somalicurrent.com/2015/08/16/a-kaaba-like-structure-set-up-in-mogadishu-to-familiarise-hajj-goers-with-the-process/

http://modernforall.blogspot.in/2014/08/Kaaba.html


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