रेवाड़ी, सहकारिता राज्य मंत्री बिक्रम सिंह यादव की सिफारिश पर जिंदा व्यक्ति को मृत बताकर एक लाख रुपये मुआवजा देने का पत्र जारी करने का मामला सामने आया है। हालांकि गलती पकड़ में आने पर पत्र को दुरुस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति के नाम पर पत्र जारी हुआ है वह इस बार जिला परिषद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।

कोसली क्षेत्र में दो और चार अप्रैल को हुई ओलावृष्टि से फसलों में भारी नुकसान हुआ था। छह अप्रैल को दड़ौली की अनिता पत्नी मुंशीराम खेत में गई तो बर्बाद फसल को देख उसे हार्ट अटैक हुआ और उसकी मौत हो गई। इसके बाद उसके घर पहुंचे कैबिनेट और राज्य मंत्री ने सरकार की ओर से बतौर मुआवजा दो लाख रुपये देने की घोषणा की थी।

एक लाख रुपये तो महिला के परिजनों को मिल गए, लेकिन एक लाख अटके हुए थे। इस राशि के भुगतान के लिए सहकारिता राज्य मंत्री यादव की सिफारिश पर पत्र जारी किया गया था। जिस व्यक्ति को मृतक बताकर पत्र जारी किया गया है, वह सुरेंद्र माड़िया है और जिला परिषद के वार्ड नंबर-6 से चुनाव लडने की भी तैयारी कर रहा है।

माड़िया का कहना है कि 28 नवंबर को जब उसके पास पत्र आया तभी उसने मंत्री कार्यालय में इसकी सूचना दे दी थी। इसके बाद 30 नवंबर को जारी पत्र मुंशीराम के नाम से जारी हुआ है।

सुरेंद्र माड़िया का कहना है कि दोनों पत्र 18 नवबंर को जारी हुए हैं। मृतका अनिता उसकी चाची थी। उसकी बेटी की दो दिसंबर को शादी थी। इसलिए पांच नवंबर को वह अपने चाचा और कुछ ग्रामीणों के साथ मंत्री से मिला था और मुआवजा शीघ्र दिलाने के लिए उन्हें पत्र सौंपा था, जिसमें अनीता पत्नी मुंशी और आगे खुद (सुरेंद्र) का नाम लिखा।

28 नवंबर को मंत्री यादव की सिफारिश से ग्राम पंचायत को जो पत्र मिला है, उसमें लिखा है कि मृतक सुरेंद्र माडिया के परिजनों को एक लाख का मुआवजा जारी कर दिया जाए। इसकी सूचना माडिया ने मंत्री कार्यालय को दी और दो दिन बाद 30 नवंबर को जो पत्र उसे मिला उसमें मुआवजा राशि मुंशीराम पति अनिता के नाम जारी किए जाने का जिक्र है।

सहकारिता राज्यमंत्री बिक्रम सिंह यादव ने ‘ओलावृष्टि के सदमे से मरने पर दी जाने वाली वित्तीय सहायता में भ्रष्टाचार की’ खबर का खंडन किया है। एक बयान में उन्होंने कहा कि कार्यालय की गलती से सिफारिश पत्र में स्व. अनिता देवी के परिवार की जगह अनुरोध करने वालों में शामिल सुरेन्द्र का नाम गलती से लिखा गया।� इसमें किसी प्रकार के भ्रष्टाचार का सवाल ही नहीं उठता।

मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। पत्र ऊपर से आया होगा। यहां से कोई गलती नहीं हुई है।

साभार amarujala.com


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