मस्जिद खुदा की इबादतगाहें हैं। मस्जिदों को बनाने के पीछे हुकूमतों और सल्‍तनतों के ईमान काम करते रहे हैं। हिंदुस्‍तान में मस्जिदों का इतिहास सीधे मुगलकाल से जाकर जुड़ता है। खुदा को याद करने के लिए पांच वक्‍ती नमाज की यह इबादतगाहें, जहां एक ओर आवाम को सुकून और शांति देती रहीं, तो वहीं सल्‍तनतों के शासक भी इन मस्जिदों में सिर नवा कर सजदा करते रहे। आइए आपको बताते हैं भारत की 10 ऐसी मस्जिदों के बारे में जो न केवल दुनिया में अपने बड़े आकारों के लिए जानी जाती है, बल्कि अपनी खूबसूरत मुगलकालीन वास्‍तुकला और शिल्‍प के दम पर पूरे एशिया और विश्‍व में अपनी खास जगह रखती है।

जमाली-कमाली मस्जिद 

जमाली दरअसल एक सूफी संत थे और कमाली उनके दोस्‍त थे। मस्जिद का नाम उन्‍हीं के नाम पर रखा गया है। यह मस्जिद ऐतिहासिक है, लेकिन इसे इतिहास में उस तरह जगह नहीं मिल पाई जैसी और मस्जिदों को मिली है। दिल्‍ली स्थित इस मस्जिद को सिंकदर लोधी के दौर में बनवाया गया था। देश की राजधानी दिल्‍ली के महरौली के डीडीए पार्क में स्थित इस मस्जिद में बलबन के मकबरे के अवशेष भी हैं। इस मस्जिद की हाल ही में मरम्‍मत की गई है। इस मस्जिद के निर्माण में एक लंबा समय लगा। इसका निर्माण सिकंदर लोधी के शासनकाल में 1528 ईसवी में हुआ था और लगभग 1536 में हुमायूं के शासनकाल में खत्‍म हुआ। यह मस्जिद लाल पत्थर और संगमरमर से बनी है।

कुव्‍वत उल इस्‍लाम मस्जिद 

दिल्‍ली स्थित यह मस्जिद इस्‍लामिक कला का बेजोड़ नमूना कही जाती है। इसका निर्माण का कार्य 1192 में कुतुबद्दीन ऐबक ने शुरू करवाया था, लेकिन वह इसे पूरा नहीं करवाया। हालांकि बाद में इसे इल्‍तु‍तमिश ने 1230 और 1315 में अलाउद्दीन खिलजी ने पूरा करवाया। मस्जिद को बनाने के दौरान रायपिथौड़ा स्थित कई मंदिरों से उसके स्‍तंभ लाए गए थे, इसलिए इस मस्जिद पर हिन्‍दू कला की छाप मिलती है।

अढाई दिन का झोपड़ा

नाम सुनकर बड़ा ही अजीब लगता है और झोपड़ा शब्‍द सुनकर मन में किसी झोपड़े की ही आकृति बनती है, लेकिन अजमेर स्थित इस मस्जिद का नाम यही है अढाई दिन का झोपड़ा। कमाल की बात है कि इसके नाम के साथ ही इसके निर्माण को लेकर कई तरह की मान्‍यताएं प्रचलित हैं। जैसे की नाम से ही पता चलता है कि इसे बनाने में तकरीबन ढाई दिन का समय लगा, तो इसे अढाई दिन का झोपड़ा कहा जाने लगा। वहीं दूसरे लोग यह मानते हैं कि यहां चूंकि ढाई दिन का मेला लगता है कि इसलिए इसे अढाई दिन का झोपड़ा कहा गया। बहरहाल, भारतीय इस्‍लामिक समुदाय में यह एक मुख्‍य स्‍थान रखती है। इस मस्जिद को मोहम्‍मद गौरी ने 1198 में बनवाया था।

अजमेर की जामी मस्जिद

यह मस्जिद अजमेर में स्थित है। इसे शाहजहां की मस्जिद भी कहा जाता है। तकरीबन 45 मीटर लंबी इस मस्जिद की 11 मेहराबें हैं। इस मस्जिद को बनाने के लिए मकराना से पत्‍थर मंगवाए गए थे। यह सफ़ेद संगमरमर की बनी हुई है। ठेठ मुगल शैली में बनाई गई यह मस्जिद वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। मान्‍यता है कि इस मस्जिद के गुंबद को बनाने के लिए जिस संगमरमर का प्रयोग हुआ है वह उसी खदान से निकाला गया है, जिसमें से ताजमहल के लिए संगमरमर निकाला गया था।

नगीना मस्जिद:

आगरा स्थित यह मस्जिद संगमरमर की बनी बेहद सुंदर मस्जिद। यह अपने मीनार रहित ढांचे तथा विषेश प्रकार के गुम्बद के लिए जानी जाती है। यह देश की बेहद खूबसूरत मस्जिदों में से एक है। इस मस्जिद दरअसल, शाही इबादतगाह के रूप में बनाई गई थी और इसमें मुस्लिम महिलाएं नमाज अदा करती थीं। इस मस्जिद का निर्माण शाहजहां ने 1653 में करवाया था।

हैदराबाद की मक्‍का मस्जिद

हैदराबाद स्थित यह मस्जिद एक ऐतिहासिक मस्जिद है। माना जाता है कि यह भारत की सबसे पुरानी मस्जिद है। इतिहासकारों की मानें तो हैदराबाद के 6वें सुलतान मुहम्मद क़ुली क़ुत्बशाह ने 1617 मे मीर फ़ैज़ुल्लाह बैग़ और रंगियाह चौधरी के निगरानी में इसे बनवाना शुरू किया था। यह काम अब्दुल्लाह क़ुतुबशाह और तानाशाह के वक़्त में भी ज़ारी रहा और 1694 में मुग़ल सम्राट औरंग़ज़ेब के वक़्त में पुरा हुआ। कहते है कि इसे बनाने मे लगभग 8000 राजगीर और 77 वर्ष लगे। यह मस्जिद बेहद खूबसूरत मस्जिदों में से एक है।

जामा मस्जिद

आगरा स्थित जामा मस्जिद देश की प्रसिद्ध मस्जिदों में से एक है। इस मस्जिद का निर्माण शाहजहां ने अपनी बेटी जहांआरा के लिए 1648 में करवाया था। आकार में बेहद विशाल मस्जिदों में से एक इस मस्जिद का बरामदा बहुत ही बड़ा है। यह मस्जिद बहुत खूबसूरत भी है।

जामा मस्जिद दिल्‍ली

दिल्‍ली स्थित जामा मस्जिद एक ऐतिहासिक मस्जिद है। इस मस्जिद का निर्माण सन् 1656 में सम्राट शाहजहां ने करवाया था। पुरानी दिल्ली में स्थित यह मस्जिद लाल और संगमरमर के पत्थरों से बनीं हुई है। ऐतिहासिक लालकिले से महज 500 मी. की दूरी पर स्थित भारत की बड़ी मस्जिदों में से एक है। इस मस्जिद के शाही इमाम के निर्देश देश भर के मुस्लिम समुदाय पर खास प्रभाव रखते हैं। ऐतिहासिक दस्‍तावेजों के अनुसार इस मस्जिद को बनाने में पूरे 6 साल लगे और उस जमाने में तकरीबन 10 लाख रुपये खर्चा आया। बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से बनी यह मस्जिद काफी भव्‍य और खूबसूरत दिखाई देती है।

हजरत बल मस्जिद

जम्‍मू-कश्‍मीर की राजधानी श्रीनगर स्थित इस मस्जिद को हजरतबल, अस्सार-ए-शरीफ, मादिनात-ऊस-सेनी, दरगाह शरीफ और दरगाह जैसे नामों से भी जाता है। यह श्रीनगर की सबसे प्रसिद्ध जगह डल झील के किनारे स्थित है। इसका निर्माण पैगम्बर मोहम्मद मोई-ए-मुक्कादस के सम्मान में करवाया गया था। यहीं पर विश्वप्रसिद्ध हजरतबल दरगाह भी है। खूबसूरती में इस मस्जिद का कोई सानी नहीं, जबकि डल झील तो इसी सुंदरता को और बढ़ा देती है। इसी मस्जिद में हजरत मोहम्मद की दाढ़ी का बाल (मोय ऐ मुक़्क़्द्दस) रखा गया है, इसलिए इस मस्जिद को बेहद पवित्र माना जाता है। पूरे देश से मुस्लिम बड़ी संख्‍या में यहां दर्शन करने आते हैं।

ताजुल मसाजिद

भोपाल स्थित ताजुल मस्जिदा पूरे भारत की शान है। इतिहासकारों की मानें तो यह दुनिया की तीसरी बड़ी मस्जिदों में से एक है। हालांकि कई इस्‍लामी वास्‍तुकला और शिल्‍प के जानकार इसके भव्‍य प्रांगण की वजह से इसे ही दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद मानते हैं। वैसे इस बात में कोई दो राय नहीं कि यह एशिया और भारत की सबसे बड़ी और ऊंची मस्जिद है। इसे‘मस्जिदों का मस्जिद’की संज्ञा भी दी गई है। इसका मुख्‍य भाग गुलाबी रंग का है और इसके ऊपर दो सफेद गुंबद बने हुए हैं। ये गुंबद ऊपर की ओर है, जिससे ऐसा माना जाता है कि यह खुदा की ओर जाने का रास्‍ता है। इतिहास में झांकें तो पता चलता है कि यह मस्जिद लंबे समय तक केवल पैसे की कमी की वजह से नहीं बन पाई और बाद में कई रुकावटों के साथ बनाया गया। इसे पहले सिकन्दर बेगम या सिकन्‍दर जहां ने बनवाया था। हालांकि इसका निर्माण उनके जीते जी पूरा नहीं हो पाया, लेकिन बाद में इसका काम शाहजहां बेगम ने अपने हाथों में लिया, लेकिन वह भी इसे पूरा नहीं करवा पार्इं बाद में इसे 1970 में मुहम्‍मद इमरान ने पूरा करवाया।

 


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