फेसबुक के संस्थापक मार्क ज़ुकरबर्ग ने कहा है कि वह प्रसिद्ध अरब इतिहासकार इब्ने खलदून की किताब का अध्ययन कर रहे हैं। मार्क ज़ुकरबर्ग ने फेसबुक पर अपनी पोस्ट में लिखा है कि “इब्ने खलदून की किताब मुक़द्दमा का एक साल तक मैं अध्ययन करूंगा, यह विश्व का इतिहास है जिसे 12 वीं सदी के एक विद्वान ने लिखा है, इस किताब का बुनियादी बिन्दु यह है कि समाज और संस्कृति कैसे आगे बढ़ती है, इसके अतिरिक्त इस किताब में नगर निर्माण, राजनीति, व्यापार और विज्ञान के बहुत से विषयों पर चर्चा की गयी है। “

मार्क ज़ुकरबर्ग ने लिखा है किः उस समय जिन विषयों पर विश्वास किया जाता है उनमें से बहुत कुछ सात सौ वर्ष के दौरान विकास के बाद रद्द किया जा चुका है किंतु फिर भी यह किताब वैश्विक दृष्टिकोण  समझने के लिए काफी रोचक है।

इब्ने खलदूनः

प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान अबू ज़ैद अब्दुर्रहमान बिन मुहम्मद बिन ख़लदून हज़रमी 27 मई सन 1332 ईसवी को ट्यूनेशिया में पैदा हुए और  19 मार्च सन 1406 ईसवी में उनका देहान्त हो गया। इब्ने खलूदन बहुमुखी प्रतिभा वाले विद्वान थे और उन्हें इतिहास और समाज शास्त्र के अग्रणी विशेषज्ञों में समझा जाता है।

इब्ने खलदून ने आरंभिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की और फिर ट्यूनेशिया के अन्य विद्वानों से कुरआन, कुरआन की समीक्षा, धार्मिक नियम, हदीस, इतिहास, कविता, दर्शनशास्त्र और तर्कशास्त्र पढ़ा उसके बाद मोरक्को और फिर दक्षिणी स्पेन के अन्दोलूसिया के दरबारों में राजनीति में व्यस्त हो गये किंतु 42 वर्ष की आयु में विश्व इतिहास के बारे में एक किताब लिखना आरंभ की किंतु उस किताब की भूमिका जो उन्होंने लिखी वह उनकी अस्ल किताब से अधिक विख्यात हुई। मुक़द्दमा उसी भूमिका का नाम है।

इब्ने खलदून को पूरब का सब से बड़ा विद्वान भी कहा जाता है। इब्ने खलदून अपनी किताब की भूमिका में लिखते हैं कि इतिहास 6 पीढ़ियों के बाद स्वंय को दोहराता है। उनके अनुसार एक समाज, खेती बाड़ी से आरंभ होता है फिर विभिन्न कलाएं सीखता है और अंतिम चरण में यह समाज इतना शक्तिशाली हो जाता है कि उसके सदस्य कला और संगीत में रूचि लेने लगते हैं और फिर कोई और समाज उस समाज पर विजय प्राप्त कर लेता है और फिर इतिहास पुनः स्वंय को दोहराने लगता है। वह इसका उदाहरण देते हुए कहते हैं कि ईरानियों को  अरबों से पराजय हुई और अरबों को तुर्कों से और तुर्कों को मंगोलो से पराजय हुई। इब्ने खलदून को इतिहास विज्ञान का संस्थापक भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अपनी इसी किताब में  विश्व में पहली बार मुख्य स्रोतो से वास्तविक तथ्यों को खोज निकालने की शैली का वर्णन किया है।

 

इब्ने खलदून की किताब, मुकद्दमाः

इब्ने खलदून की विश्व विख्यात किताब मुक़द्दमा वास्तव में उनकी किताब अलएबर पर लिखी जाने वाली भूमिका है। यह किताब अत्याधिक महत्वपूर्ण समझी जाती है और इसका सब से अधिक महत्वपूर्ण भाग वह है जिसमें उन्होंने पश्चिमी देशों के इतिहास का वर्णन किया है क्योंकि इन भागों में पश्चिमी इतिहास के उन तथ्यों को बयान किया गया है जिनका उल्लेख उससे पूर्व कहीं नहीं मिलता और उन्हें स्वंय इब्ने खलदून ने अपने परिश्रम से एकत्रित किया है। अर्थात इस भाग में उन अनुभवों और घटनाओं का उल्लेख है जो स्वंय इब्ने खलदून ने पश्चिमी देशों की यात्रा के दौरान प्राप्त किया यहां तक कि पश्चिमी इतिहास का अध्ययन करने वालों का कहना है कि यदि इब्ने खलदून की यह किताब न होती तो पश्चिम के बहुत से तथ्यों की जानकारी कभी किसी को प्राप्त नहीं हो पाती।

इब्ने खलदून की किताब के इस भाग को अधिकांश युरोपीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है जिसके बाद युरोप ने इस मुस्लिम विद्वान का लोहा माना और उन्हें पता चल गया कि इब्ने खलदून बहुत से विषयों में युरोप के प्रसिद्ध विचारकों से बहुत पहले ही अपनी महत्वपूर्ण राय प्रकट कर चुके थे। उदाहरण स्वरूप युरोपीय यह समझते थे कि  इतिहास के दर्शन पर विश्व में सब से पहले चर्चा करने वाले वीको थे किंतु इब्ने खलदून का मुक़द्दमा पढ़ने के बाद उन्हें पता चला कि वह तीन शताब्दी पहले ही इस पर चर्चा कर चुके हैं।

इसी प्रकार युरोपीय यह समझते थे कि समाज शास्त्र के संस्थापक वाले जर्मन दार्शनिक आगस्त कैन्ट  हैं किंतु इस किताब को पढ़ने के बाद उन्हें पता चला कि कैन्ट से 400 वर्ष पहले इब्ने खलदून ने  इस ज्ञान की बुनियाद रखी और इस नये ज्ञान का नाम “उमरान” रखा था।


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