droughtकोहराम न्यूज़ – स्पेशल रिपोर्ट 

इस समय देश जिस तरह सूखे की चपेट में है उससे उन राज्य को चिंता में दाल दिया है जिनका आय का मुख्य स्रोत्र कृषि है हरियाणा, पंजाब, से लेकर उत्तरप्रदेश सरकार को अगर अभी से सूखे से निपटने के लिए कुछ कारगर उपाय नही अपनाती है तो महाराष्ट्र बनने में अधिक समय नही लगेगा, जिस तरह लातूर,सोलापुर में ट्रेनों से पानी पहुंचाया जा रहा है वो भयावह स्थिति यहाँ भी कदम रख सकती है, सूख चुके कुएं, तलब पोखर खुद अपनी स्थितियां बयान कर रहे है लेकिन राज्य सरकारों का अधिक ध्यान इस मुसीबत पर ना होकर आगामी चुनावों पर है

आइये जानते है क्या है सूखा ?

आम भाषा में सूखे का अर्थ पानी की कमी है। लंबे समय तक जल की कमी को सूखे से उत्पन्न आपदा का प्रमुख कारण माना जा सकता है। लंबी अवधि तक किसी क्षेत्र में पानी की उपलब्धता में अस्थायी कमी से यह उत्पन्न होता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में प्रभाव पड़ता है। बारिश की कमी से फसल की हानि, सूखे का सबसे आमरूप है। बड़े क्षेत्र में फैले अथवा दीर्घकालीन सूखा, भयानक प्राकृतिक आपदा के रूप में हमारे सामने आता है। जिससे कभी-कभी अकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। सूखा एक मंद गति से उत्पन्न आपदा है, जो हमारे आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक क्षेत्र को कमजोर करता है। यह विकास प्रक्रिया को उलट देता है, स्वास्थ्य की समस्यायें उत्पन्न करता है, असामाजिक व्यवहार को जन्म देता है। यह हमारे मनोबल को कम करता है, प्रभावित लोगों को दूसरे क्षेत्रों में जाने को बढ़ावा देता है तथा इससे प्रभावित क्षेत्रों के अलावा आसपास के सूखे से अप्रभावित क्षेत्र भी इसके दुष्प्रभावों से अछूते नहीं रहते।

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कितने प्रकार को होता है सूखा ?

आमतौर पर अगर सूखे को विभाजित किया जाये तो इसके तीन प्रकार निकलकर सामने आते है

मौसमीय सूखा  

मौसम के कारण सूखा जो किसी क्षेत्र में मासिक अथवा मौसमी वर्षा में सामान्य से काफी कम होने पर उत्पन्न होती है जैसे की महाराष्ट्र के अगर आमतौर पर जलवायु परिवर्तन होने पर वर्षा कम होती है तो वहां नदी,पोखरों, में पानी की कमी हो जाति है जैसा की इस समय भीषण गर्मी तथा वर्षा का ना होना, इस प्रकार के सूखे से उन क्षेत्रों का नुक्सान होता है जो प्राकृतिक जल पर निर्भर होते है उत्तर भारत में हिमालय से निकलने वाली नदियों के कारण सूखे की सम्भावना कम होती है लेकिन आंध्र प्रदेश तथा सीमावर्ती इलाकों में नदियों का कमी इस सूखे को भयंकर रूप दे देती है

जलीय सूखा 

जलीय सूखा जो किसी क्षेत्र में जल की कमी के फलस्वरूप सतही जल स्त्रोतों में उपलब्ध जल की कमी से होता है। लंबी अवधि तक पड़ने वाला मौसम संबंधी सूखा भी जलीय सूखा उत्पन्न कर सकता है। जिन क्षेत्रों में लम्बी अवधि से वर्षा नही हो पाती तथा जल संरक्षण का सही इंतज़ाम नही हो पाना इस तरह के सूखे को आमंत्रित करता है सूखाग्रस्त राज्यों के आंकड़े बताते हैं कि सिंचाई योजनाओं की 40 प्रतिशत क्षमता का उपयोग ही नहीं हो पाता। कंपट्रोलर और ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कई बांध तो बन गए लेकिन नहरें नहीं बनीं जिससे जल का उपयोग ही नहीं हो सका।

कृषि सम्बन्धी सूखा 

जो पानी की कमी से फसलों में आंशिक या पूरी क्षति पहुंचाकर कृषि कार्यों को बुरी तरह प्रभावित करता है। ये भयावह स्थिति का मुख्य कारण है ना तो वर्षा का अनुपात अनुसार होना और जल संरक्षण ना होना, जिससे किसानो को समय पर जल की उपलब्धता नही होती तथा कृषि नष्ट हो जाती है बैंक से लिया गया लोन और फसल ना होने के कारण किसानो को आत्महत्या का रास्ता अधिक आसान लगता है

अगर आसान शब्दों में कहें तो भारत में सूखे की समस्या कई कारणों से आ सकती हैं। इसमें मुख्य हैं : दक्षिण पश्चिम मानसून का देरी से शुरू होना, मानसून में लंबी अवधि का अंतराल, मानसून का समय पूर्व समाप्त होना तथा देश के विभिन्न भागों में मानसूनी वर्षा का असमान वितरण। इसके अलावा इन प्राकृतिक क्रियाविधियों के अतिरिक्त मानवीय गतिविधियाँ भी, सूखे को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारण हो सकते हैं जैसे भू-उपयोग में परिवर्तन, अत्यधिक घास का चरना, अथवा वन कटाई तथा सूर्य की किरणों का विकिरण असंतुलन। इसके अलावा ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन हाउस प्रभाव जो मनुष्यों द्वारा निर्मित जलवायु परिवर्तन का कारण होती है, सूखा पड़ने के कारणों में से एक है।

सूखे के कारण 

ऐसा नही है की सिर्फ सूखे से भारत ही परेशान है भारत के बाद पानी की भारी कमी से जूझते दूसरी श्रेणी के अपेक्षाकृत छोटे देशों में शामिल हैं — अल्जीरिया, मिस्र, इरान, मेक्सिको और पकिस्तान. इनमे से चार देश अपने लिए अनाज के एक बड़े हिस्से का आयात पहले से ही किया करते हैं। सिर्फ पाकिस्तान आंशिक रूप से आत्मनिर्भर बना हुआ है। लेकिन हर साल 4 मिलियन की बढ़ती आबादी के कारण इसे भी जल्द ही अनाज के लिए विश्व बाज़ार का रुख करना पड़ेगा.संयुक्त राष्ट्र की जलवायु रिपोर्ट के अनुसार हिमालय के हिमनद जो एशिया की सबसे बड़ी नदियों – गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, यांग्जे, मेकांग, सलवीन और येलो के लिए शुष्क-मौसम के प्रमुख जल स्रोत हैं, ये तापमान में वृद्धि और मानवीय मांग बढ़ने के कारण 2035 तक गायब हो सकते हैं।  बाद में यह पता चला कि संयुक्त राष्ट्र संघ की जलवायु रिपोर्ट में इस्तेमाल किये गये स्रोत में दरअसल 2035 नहीं बल्कि 2350 कहा गया है। हिमालयी नदियों के जलनिकास मार्ग के आसपास की भूमि में लगभग 2.4 बिलियन लोग रहते हैं। भारत, चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार को आने वाले दशकों में गंभीर सूखे के बाद बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है। सिर्फ भारत में ही गंगा नदी 500 मिलियन से अधिक लोगों को पेयजल और खेती के लिए पानी उपलब्ध कराती है

चलिए अब बात करते है सूखे के मुख्य कारणों तथा बचाव उपायों पर 

बारिश का ना होना  – चूँकि जलवायु परिवर्तन सूखे का एक बहुत बड़ा कारक है वही इसके उल्ट वर्षा की ठीक ठीक भविष्यवाणी भी नही की जा सकती तारीख आगे पीछे होती रहती है ये ज़रूरी नही की पिछले वर्ष जिस दिन मानसून आया था अगले साल भी उसी दिन वर्षा होगी. उतार चढ़ाव आता रहता है महाराष्ट्र में पिछले सालों में बारिश आमतौर पर सामान्य होती रही है लेकिन कभी देर से होती है, कभी अनियमित। परिणाम यह होता है कि किसान बारिश के इंतजार में गर्मियों की फसलें नहीं लगा पाते और फिर इसका खामियाजा भुगतते हैं। इसलिए पानी का सही प्रबंधन सबसे जरूरी है।

सिचाईं प्रोजेक्ट का सही उपयोग ना होना – आकंडे बताते है की सिचाईं प्रोजेक्ट का 40 प्रतिशत  क्षमता का भी उपयोग सही ढंग से नही हो पाता, कितने ही ऐसे प्रोजेक्ट हिया जो मात्र लालफीता शाही में लपेटे हुए है ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट बताती है की कई जगह बाँध तो बनाए गये लेकिन उसमे से नहरें नही निकाली गयी, क्यों नही निकाली गयी इसका कोई कारण नही बताया गया है

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photo – indiaresource.org

कृषि से अधिक उद्धयोगो को जल आपूर्ति – किसान हमे खाना देता है, उद्द्योग नौकरी देते है लेकिन बहुत से ऐसे उद्द्योग है जो ना सिर्फ पानी को व्यय करते है वरन उस जगह का पानी भी सोख लेते है जैसे कोल्ड्रिंक का प्लांट अगर किसी स्थान पर लगाया जाता है तो कुछ ही वर्षों में वो अपने आसपास के क्षेत्रों का वाटर लेवल कम कर देता है उदहारण के लिए उत्तराखंड के पंतनगर सिडकुल में लगाया कोक प्लांट जहाँ कुछ वर्ष पहले पानी का स्तर 12 फीट था वही अब बढ़कर 30 फीट हो गया है, अकेला महाराष्ट्र ऐसा राज्य है जो कृषि से अधिक व्यवसास को जल आपूर्ति को प्राथमिकता देता है

पानी का सही उपयोग ना होना  – महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा गन्ने जैसी फसलों की खेती होती है जो सबसे ज्यादा पानी सोखती हैं। यह सूखाग्रस्त और पानी के मामले में दरिद्र राज्य पूरे देश की लगभग 66 प्रतिशत चीनी का उत्पादन करता है। जबकि उत्तर प्रदेश में गंगा बेसिन के इलाके में इसकी खेती ज्यादा बेहतर हो सकती है। इसलिए किस खेत के लिए पानी का उपयोग किया जाए, इसे लेकर भी समझदारी का अभाव है। मसलन के तौर पर जिन राज्यों में पानी की अधिकता है जैसे हरियाणा, पंजाब, यूपी इन राज्यों में सरकार को ऐसी कृषि के लिए किसानो को प्रोत्साहन देना चाहिए

भूमि के भीतर पानी को रिचार्ज – कंक्रीट के जंगलों में रहने के कारण वर्षा के जल को भूमि में दोबारा संचय होने रास्ता नही मिल पाता, बड़े शहरों में उपयोग किया गया जल तथा वर्षा का पानी शहर से बाहर निकाल दिया जाता है जिससे भूमि में जल का स्तर बढ़ने की बजाय और अधिक घट जाता है, इसे समझने के लिए सबसे आसान तरीका है की मिनिरल वाटर की फैक्ट्री – जब कोई मिनिरल वाटर फैक्ट्री अपना प्लांट लगाती है तो सेकड़ों लीटर पानी बोतलों में भरकर देश के दूरगामी क्षत्रों में भेज दिया जाता है जिसके कारण जल का पुन: संरक्षण उस क्षेत्र में नही हो पाता, जो पानी एक बार चला गया वो हमेशा के लिए चला गया और अपने पीछे छोड़ गया जल का घटा हुआ स्तर

मृदा संरक्षण के क्षेत्र में अक्षम – हम जमीन के भीतर पानी को रिचार्ज करने और मृदा संरक्षण के क्षेत्र में निवेश करने में भी अक्षम रहे हैं। पिछले कुछ सालों में पानी के संरक्षण के लिए तालाब और टैंक आदि बनाने की तरफ लोगों का ध्यान गया है। लेकिन इसके लिए धन की बहुत कमी है। यहां तक कि रोजगार गारंटी योजना के तहत भी बहुत उत्पादक काम नहीं हो पा रहा है। इस योजना के तहत नौकरियां तो मिल रही हैं लेकिन काम की गुणवत्ता नहीं। जल संरक्षण के लिए पेड़ तो लगा दिए जाते हैं लेकिन पेड़ों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं होता। इस तरह हम पाते हैं कि सूखे की समस्या बहुत हद तक मानव निर्मित हैं

 कोहराम न्यूज़ के लिए लिखा गया स्पेशल लेख 

 Reference –

http://hindi.indiawaterportal.org/node/38213

http://mpinfo.org/MPinfoStatic/rojgar/2015/1708/other14.asp

https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A5%82%E0%A4%96%E0%A4%BE


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