igt1

टैलेंट को सिर्फ एक शब्द में परिभाषित नही किया जा सकता कहते है हर इंसान में कुछ अलग टैलेंट होता है जैसे सचिन तेंदुलकर में टैलेंट था तो आज क्रिकेट के भगवान् कहे जाते है, धनराज पिल्लई में हॉकी को जादू की स्टिक बनाने का टैलेंट था, विश्वनाथन आनन्द का टैलेंट उनका तेज़ तर्रार दिमाग और बहुआयामी सोच है, शाहरुख़ खान का टेलेंट उनकी बेहतरीन अदाकारी है, पीटी उषा का टैलेंट तेज़ दौड़, पीसी सरकार का टैलेंट जादूगरी और हाथ की सफाई, लता मंगेशकर का टैलेंट उनकी सुरीली आवाज़, एआर रहमान का टेलेंट उनका लाजवाब संगीत.

यहाँ इतने टैलेंट को बताने के पीछे सिर्फ ये कारण है की हम किसी एक के टैलेंट की तुलना दुसरे के टैलेंट से नही कर सकते – क्या सचिन तेंदुलकर के विश्व रिकॉर्ड की तुलना एआर रहमान के ऑस्कर से हो सकती है — इसका ज़ाहिर सा जवाब है …नही.

कलर टीवी पर आने वाले शो India’s Got Talent देश का एकमात्र ऐसा शो है जिसका नाम कुछ और काम कुछ और है, जैसे सिगिंग शो सा रे गा मा सिंगिंग के लिए बनाया गया है, फियर फैक्टर, रोडीस जैसे शो कठिन टास्क को ध्यान में रखकर बनाए गये है, कौन बनेगा करोड़पति के नाम से ही पैसा झलकता है लेकिन India’s Got Talent एक ऐसा शो है जिसका नाम टैलेंट पर है लेकिन Talent के नाम पर सिर्फ सिंगिंग और डांसिंग को ही महत्व दिया जाता है|

ऐसा नही है की कोहराम न्यूज़ की नज़र में डांसिंग और सिंगिंग कोई टैलेंट नही है, हाँ टैलेंट है लेकिन क्या सिर्फ यही टैलेंट है इसके अलावा शो में आने वाले कंटेस्टेंट अगर डांसिंग और सिंगिंग से हटकर कुछ अलग करते है तो उन्हें आँखों पर दुपट्टा रखकर बाहर कर दिया जाता है,

अपनी बात आगे बढाने से पहले एक बार नीचे दिए गये फोटो पर एक बार नज़र मार लीजिये

igtवैसे इस लिस्ट को देखकर आप समझ ही गये होंगे की ये शो किस टैलेंट की बात कर रहा है

चलिए उन कारणों को खोजते है जिसकी वजह से ये शो देश के अन्य टैलेंट का नाम खराब कर रहा है

जजों का निर्धारण – शायद शो बनाने वालो ने सोचा होगा की भारत की जनता फिल्मो की दीवानी है इसीलिए सभी जज फ़िल्मी दुनिया से ही ले लो, किरण खेर, करण जौहर, मल्लिका अरोड़ा सभी फ़िल्मी दुनिया से आते है तो इनसे कैसे उम्मीद की जाये की इन्हें किसी और का टेलनेट पसंद आयेग, मसलन के तौर पर एक अच्छा उस्ताद ही बारीकी समझ सकता है. इस लेख में अगर कहीं व्याकरण की गलती होगी तो वही पकड़ पाएगा जिसने हिंदी बहुत अच्छे से पढ़ी होगी,इसीलिए दूसरों के टैलेंट को समझने के लिए उनकी बारीकी भी समझनी पड़ेंगी, जिसके लिए जजों का चुनाव बहुत मायने रखता है|

अन्य लोगो का टैलेंट ना देख पाने की क्षमता – ये पॉइंट पढने के बाद शायद आपको लगे की कोहराम न्यूज़ फिल्मों के खिलाफ है लेकिन ऐसा नही है क्या वो टैलेंट नही है तो उलटे बैठकर साइकिल चलाते है, वो टैलेंट नही है शरीर को कैसे भी मोड़ लेते है? क्या वो टैलेंट नही है हाथ से नारियल फोड़ देते है, क्या वो टैलेंट नही है जो कराटे सीखने के बाद जलती प्लेट को तोड़ते है ? या उनका टैलेंट आँखों पर दुपट्टा रखने और हूटर बजाने तक की अहमियत रखता है ?

सिर्फ तीन लोगो द्वारा चुनाव – एक तरफ तो ये शो इंडिया के टैलेंट की बात कर रहा है वहीँ दूसरी तरह मात्र तीन लोगो के पास अधिकार की किसे हूटर बजकर रखना है और किसे बाहर का रास्ता दिखाना है, क्या सिर्फ तीन लोग देश के टैलेंट का चुनाव कर सकते है ? होना ये चाहिए की जजों के पास कंटेस्टेंट को इन् या आउट करने की पॉवर ना होकर दर्शकों के पास हो, जिससे पारदर्शिता बनी रहे.

अगर ऐसा ही रहा तो ये देश के उन मेहनती लोगो के लिए बहुत बड़ी बेईज्ज़ती की बात होगी जो कई कई साल किसी टैलेंट को सीखने में लगा देते है, जिस देश में एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है उस देश में टैलेंट की कोई कमी नही है, तो बंद करो टैलेंट के नाम पर देश के असल टैलेंट की बेइज्जती.

(कोहराम न्यूज़ के लिए लिखी गयी स्पेशल रिपोर्ट)


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें