सेना के एक जवान ने अपनी 40 प्रति माह पेंशन के लिए 40 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। लखनऊ की आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की बेंच भी उस समय चौंक पड़ी जब उसे पता चला की सेना का यह जवान महज 40 रुपए 50 पैसे प्रति माह की पेंशन के लिए 40 सालों से कोर्ट के चक्कर लगा रहा है। 67 साल के सुनहरी लाल की दर्दभरी दास्तान को जानकार बेंच ने दुख व्यक्त किया और रक्षा मंत्रालय को आदेश देते हुए कहा कि लाल को ऐरियर के साथ पेंशन का भुगतान और अतिरिक्त 25 हजार स्पेशल कॉस्ट फिक्स्ड राशि भी दी जाए।

इलाहबाद के प्रिंसिपल कंट्रोलर आॅफ डिफेन्स एकाउंट्स (पेंशन) के पूर्व के आदेश को खारिज करते हुए जस्टिस वीके दीक्षित एंड लेफ्टिनेंट जनरल ज्ञान भूषण की दो सदस्यों वाली खंडपीठ ने मंत्रालय को यह भी आदेश दिया है की इस मामले को री-सर्वे मेडिकल बोर्ड को भेजकर उसकी मौजूदा मेडिकल कंडीशन की जांच कर उसी के मुताबिक पेंशन फिक्स की जाए। बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, यह बहुत ही क्रूर मामला है कि कोर्ट में 40 सालों तक चप्पल घीसने के बाद लाल को सिर्फ 40 रुपए पेंशन मिलेगा।

इस केस में देरी के लिए याची की कोई गलती नहीं है। इनके उम्र, हेल्थ और इन सालों में इनके द्वारा झेली गई आर्थिक तनाव को ध्यान में रखते हुए हम यह महसूस करते हैं कि लाल को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। (liveindiahindi)


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