1ढाई साल लगे क़ुरान शरीफ को लिखने में 

झारखंड की एक स्कूल टीचर ने अपनी ज़िंदगी के अंधेरे से लड़ते हुए नेत्रहीन लोगों के लिए ब्रेल में कुरान लिखा है. बोकारो के एक स्कूल में हिंदी पढ़ाने वाले वाली नफ़ीस तरीन ने ढाई साल की कड़ी मेहनत के बाद 965 पन्नों में कुरान को ब्रेल में लिखा है.

कुरान पढ़ने की कोशिश करते हुए नफ़ीसा के सामने इतनी मुश्किलें आईं कि उन्होंने अपने जैसे दूसरे लोगों के लिए ब्रेल-हिंदी में कुरान लिखने की ठान ली. बोकारो स्टील प्लांट में काम करने वाले मोहम्मद मुख़्तार असलम की बेटी नफ़ीस के संघर्ष की कहानी कई लोगों के लिए मिसाल बन सकती है.

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