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नई दिल्ली। समझौता धमाके के आरोपी स्वामी असीमानंद के कबूलनामे ने देश में एक बार फिर बवाल खड़ा कर दिया है। सवाल सीधे उन चेहरों पर उठ रहा है जिनके असीमानंद से रिश्ते थे। असीमानंद ने मजिस्ट्रेट के सामने इकबालिया बयान दिया है। वो बयान जिसे देने के बाद मुकरा नहीं जा सकता। असीमानंद ने ये बयान दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में 18 दिसबंर 2010 को दिया था।

असीमानंद ने कहा-2005 में शबरीधाम में आरएसएस की कार्यकारिणी समिति के सदस्य इंद्रेश जी हमें मिले थे। उस समय सुनील जोशी भी वहां पर था। इंद्रेश जी ने हमको बताया कि आप जो बम का जवाब बम की बात करते हो वो आपका काम नहीं है। आप जो सोच रहे हैं हम लोग भी इस विषय पर सोचते हैं। सुनील को इस काम की जिम्मेदारी दी गई है। इंद्रेश जी ने कहा कि सुनील को जो मदद चाहिए वो हम करेंगे।

संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने असीमानंद को उसके गुजरात के डाग में बने शबरीधाम में ये सबकुछ बताया। यानी देश में बम धमाकों का जबाब धमाकों से देने की योजना इंद्रेश कुमार की थी। देश में हुए इन चार धमाकों का अंजाम देने का काम इंद्रेश कुमार ने ही सुनील जोशी को सौंपा था। इंद्रेश कुमार चाहते थे कि ये काम केवल उनकी ओर से नियुक्त शख्स ही अंजाम दे। इंद्रेश कुमार ने ना केवल धमाकों की साजिश में पीछे रहकर भूमिका निभाई बल्कि पैसे का भी इंतजाम किया। सवाल ये कि क्या ये पैसा संघ का था।

असीमानंद ने कहा-मुझे ये भी पता चला कि सुनील जोशी भरतभाई के साथ नागपुर में इंद्रेश जी से मिले थे और इंद्रेश ने भरतभाई के सामने सुनील को 50 हजार रुपए दिए थे। कर्नल पुरोहित ने भी एक बार मुझे बताया था कि इंद्रेश जी आईएसआई के एजेंट हैं।

असीमानंद ने कहा-सुनील जोशी ने मुझे बताया कि अजमेर में जो बम कांड हुआ है वो हमारे ही लोगों ने किया है। सुनील ने ये भी बताया वो भी वहां पर था। मैंने सुनील जोशी से पूछा कि आपके साथ और कौन-कौन लोग थे। सुनील ने जवाब दिया कि हमारे साथ दो और मुस्लिम लड़के भी थे। मैंने सुनील से पूछा कि मुस्लिम लड़के तुम्हें कैसे मिले तो सुनील जोशी ने कहा कि लड़के इंद्रेश जी ने दिए थे।

गौरतलब है कि संघ में इंद्रेश कुमार मुसलमानों को जोड़ने का काम करते थे, इसके लिए पहले माई हिंदुस्तान और फिर मुस्लिम राष्ट्रवादी मंच बनाया। इसके बहाने वे मुस्लिम बहुल इलाकों के साथ मुस्लिम धर्म स्थलों की भी यात्रा करते थे।

स्वामी असीमानंद के इकबालिया बयान ने संघ की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के चार बड़े धमाके और सभी के तार असीमानंद से जुड़ते हुए। वाराणसी में संकटमोचन मंदिर में धमाके से जब पूरा देश सन्न था तब उसके एक महीने बाद गुजरात के डांग में असीमानंद के आश्रम पहुंची थी साध्वी प्रज्ञा सिंह। साथ में थे तीन लड़के जिनमें से एक नाम सुनील जोशी। बैठक में गुजरात के अक्षरधाम से लेकर संकटमोचन मंदिर तक देश में हिंदू मंदिरों पर हो रहे धमाकों का जवाब देने का फैसला किया गया। बम धमाकों का जवाब बम धमाकों से। असीमानंद ने दिल्ली में अपने इकबालिया बयान में इसका पूरा खुलासा किया है।

असीमानंद ने बताया कि हमने तय किया कि सुनील जोशी और भारतभाई झारखंड जाएंगे और कुछ सिमकार्ड और पिस्टल जैसे हथियार खरीद कर लाएंगे। मैंने उन्हें सामान खरीदने के लिए 25 हजार रुपए भी दिए। वो पैसा मैंने सुनील जोशी के हाथ में दे दिया था। अप्रैल 2006 में वो दोनों इस काम के लिए निकल गए।

इसके बाद जून 2006 में गुजरात के वलसाड में फिर एक बैठक हुई जिसमें ये तय किया गया कि धमाकों का जवाब धमाकों से दिया जाएगा। बैठक में प्रज्ञासिंह, असीमानंद के साथ सुनील जोशी, रामजी कलसांगरे औऱ संदीप डांगे भी थे।

असीमानंद के रडार पर सबसे पहले आया मालेगांव क्योंकि यहां की नब्बे फीसदी आबादी मुस्लिम थी, फिर हैदराबाद की मक्का मस्जिद चुनी गई। वजह ये क्योंकि मक्का मस्जिद के पास ज्यादातर आबादी मुस्लिम होने से शक उन पर नहीं होगा। फिर चुना गया अजमेर दरगाह शरीफ को। वजह थी अजमेर में मुस्लिमों के साथ हिंदू भी जाते हैं, धमाकों के बाद वे नहीं जाएंगे और पाकिस्तान को मैसेज जाएगा।

असीमानंद ने अपने इकबालिया बयान में खुलासा किया है कि सुनील जोशी ने ही चारों जगहों की रेकी करने की जिम्मेदारी ली थी। सुनील जोशी ने ये भी सुझाव दिया कि भारत-पाकिस्तान के बीच में चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में केवल पाकिस्तानी ही यात्रा करते हैं इसलिए समझौता एक्सप्रेस में भी बम ब्लास्ट करना चाहिए।

असीमानंद ने जज के सामने ये भी बयान दिया कि सुनील जोशी ने बाकायदा उसे धमाकों के बाद अखबार देखने की बात कही थी। उसने कहा-मुझे बताया गया कि दो-तीन दिन में ही कुछ अच्छी खबर मिलेगी आप पेपर देखते रहना। फिर में भरतभाई के घर गया जहां सुनील और प्रज्ञा पहले से मौजूद थे। तब तक समझौता ब्लास्ट की खबर पेपर में आ चुकी थी। मैंने सुनील को बताया कि समझौता एक्सप्रेस की घटना तो हो चुकी है और तुम यहीं बैठे हो। जवाब में उसने बताया कि ये हमारे ही लोगों ने किया है।

फिर इसी तरह अजमेर औऱ हैदराबाद में सुनील जोशी ने धमाकों को अंजाम दिया। असीमानंद ने इकबालिया बयान में कहा कि खुद संदीप ढांगे और रामजी नाम के दो मुख्य आरोपी इन धमाकों के बाद उनसे आकर मिले थे।

उसने बताया कि मैं उनको लेकर राजपीपला होकर वडोदरा जंक्शन तक लेकर आया। वो लोग जंक्शन पर उतर गए। मुझे बाद में एहसास हुआ कि वो दोनों मालेगांव बम ब्लास्ट के अगले दिन ही मुझसे वहां मिले थे। संदीप के साथ जो दूसरा आदमी था वो मुझे बाद पर पता चला कि उसका नाम रामजी था।

असीमानंद ने कोर्ट में इकबालिया बयान में स्वीकार किया कि सुनील जोशी के साथ वो इस साजिश में शामिल था, बम बनाने के लिए धन भी उसने ही उपलब्ध कराया। ये बात भी साफ हो रही है कि कैसे संघ के एक दिग्गज की जानकारी में पूरी साजिश को अंजाम तक पहुंचाया गया। 34 पन्ने का ये दस्तावेज संघ के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।

(ये बयान सर्वप्रथम IBN खबर पर Jan 07, 2011 को प्रकाशित हुआ था जिसको कोहराम न्यूज़ ने बिना किसी बदलाव के प्रकाशित किया हैं. पाठकगण पढ़ें: असीमानंद का पूरा कबूलनामा, RSS का सिरदर्दपर इसको पड़ सकते हैं. साथ ही कोहराम न्यूज़ IBN खबर का साभार प्रकट करता हैं)


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