नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) मुसलमानों ने साल 2014 की प्रतिष्ठित सिविल सर्विसेज परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है। जिन करीब 1200 परीक्षार्थियों को सफलता मिली है, उनमें से 37 मुसलमान हैं। यानी वे आईएएस, आईएफएस, आईपीएस जैसी एलिट सरकारी सेवाओं में जाएंगे।

इस परीक्षा के नतीजे बीते हफ्ते जारी हुए। सबसे बड़ी बात ये है कि इनमें से 4 पहले सौवें स्थान पर रहे हैं। हालांकि जो मुसलमान सिविल सेवा की परीक्षा में पास हुए उनका संबंध किन सूबों से है, ये तो नहीं पता चल सका है। पर, जानकार दावा करते हैं कि बेशक उत्तर प्रदेश तथा बिहार से कुछ रहें होंगे। मिलती कामयाबी अगर साल 2010 से बाद के आंकड़ों को देखेंगे तो आपको मिलता-जुलता ही ट्रेंड दिखेगा।

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हर साल 20 से लेकर 30-32 मुसलमान सिविल सर्विसेज की परीक्षा में कामयाब हो रहे हैं। इन 10 प्रशासनिक अधिकारियों ने देश का सर गर्व से उंचा किया गाढ़ते झंडे महाराष्ट्र कैडर के 1975 बैच के आईएएस अफसर जफर इकबाल ने एक बार कहा था कि अगर मुसलमानों को भी पर्याप्त अवसर मिलें तो वे सिविल सर्विसेज परीक्षा में झंड़े गाढ़ सकते हैं।

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कोचिंग से लाभ राजधानी के प्रमुख शिक्षाविद् फिरोज बख्त अहमद कहते हैं कि राजधानी के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्लाय तथा कुछ और शिक्षण संस्थानों में मुसलमानों के लिए सिविल सर्विसेज की परीक्षा के लिए कोचिंग की व्यवस्था की जा रही है।

इसके चलते भी कई मुसलमान देश की सबसे एलिट सरकारी सेवाओं में जाने लगे हैं। पहले तो गरीब परिवारों से संबंध रखने वाले मेधावी बच्चे भी सिविल सर्विसेज परीक्षा में बैठने से ही डरते थे।

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