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सैय्यद ज़ैगम मुर्तज़ा 

सर सय्यद अहमद ख़ान का ख़्वाब एक मॉडर्न यूनीवर्सिटी थी… इसके चक्कर में बड़े मियां ने जूते खाए, गालियां खाईं, फतवे झेले और लानत के तौक़ गले में टांगे… लेकिन बेवजह मेहनत करते रहे। एक तो ग़लत क़ौम में पैदा हो गए बेचारे। जानते ही नहीं थे कि ये वो क़ौम है जो मुस्तक़बिल नहीं माज़ी में जीना चाहती है।

जब दुनिया चांद पर बस्तियाम बसा रही होती है तब ये चांद देख कर ईद मना रहे होते हैं। जिस दौर में दुनिया न्यूक्लियर फिज़िक्स और स्पेस साईंस की बात कर रही है उस वक़्त ये लोग फिरक़ापरस्ती और जिहालत के सबक़ पढ़ रहे होते हैं। दुनिया रिसर्च और तकनीक के बल पर दुनिया बदलने की बात कर रही है ये अपने साईंसी इदारों को मदरसे में तब्दील करने में लगे होते हैं।

हाउस ऑफ विसडम में ज़काती बैठे हैं, अल अजहर फतवे देने की दुकान हैं… एलेक्ज़ेंड्रिया, निशापुर, बग़दाद, क़ुस्तुनतूनिया, निसिबिस, इडिसा, दमिश्क के इदारे जहां इल्म के दरिया बहते थे वहां हम क़ौम के दीमक पाल रहे हैं… फिर सर सैय्यद इससे कैसे बच पाते। एएमयू कोर्ट के मेम्बरान की ताज़ा फेहरिस्त देखिए।

फतवा देने वाले मौलाना, आठवीं पास कारोबारी, रेप और मर्डर के मामले में फंसे लीडर, भूमाफिया, चोर-उचक्के, दलाल, वक़्फ के चोर और माइनारिटी के नाम पर सरकारी इमदाद गटकने वाले… सभी तो हैं। 42 की पूरी फेहरिस्त में ज़रा दस नाम ऐसे बताइए जिनके पास क़ौम के लिए विज़न हो? कोई पांच नाम ऐसे बताईए जिनका मॉडर्न साइंस, इंजीनीयरिंग, अकादमिक या समाजियात में ईमानदारी से किया कोई काम हो?

मान लीजीए… सर सैयद का मिशन हाईजैक होकर उन्हीं लोगों के पास पहुंच गया है जो इसको मिटाना चाहते थे। सर सैयद हार गए और चोर उचक्के जीत गए।

–लेखक राज्यसभा टीवी से जुड़े है 


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