मप्र में इन दिनों लगभग हर विभाग में हड़ताल चल रही है, मै अभी उमरिया, शहडोल, छतरपुर, और सतना जिलों के दूरदराज के गांवों में काम के दौरान घूमकर आया हूं। पूरा प्रदेश बुरी तरह से लकवाग्रस्त है और सारी सरकारी मशीनरी अस्त-व्यस्त है। जनता पर खासकरके गरीब जनता पर इसका बहुत असर पड़ा है। जनता को अब शिवराज को हटाकर ही चैन मिलेगा।

मुख्यमंत्री पद के घमंड में संविदा कर्मचारियों से बात करने के बजाय बेरुखी से कह रहे है कि बात ही नहीं करूंगा। अब लगता है इनके दिन पूरे हो गए है और भाजपा को जीतना है तो नया क्षत्रप खोजना होगा क्योकि शिवराज अब मैदान से लेकर प्रशासन और व्यापमं में घिर चुके है और नैया डुबो रहे है।

Strike

मप्र में संविदा स्वास्थ्य सेवा के कर्मचारियों की हड़ताल का असर

150923 बच्चों को टीका नहीं लगा।

130726 महिलाओ की प्रसव पूर्व जांच नहीं हुई।

112732 महिलाओ को अलग-अलग तरह का भुगतान नहीं हुआ

हड़ताल अवधि में होने वाले प्रसव कुल 28982 को सुविधा नहीं मिली ये प्रसव घर या अप्रशिक्षित व्यक्ति से हुए।

1172 प्रसव केन्द्रों पर प्रसव सुविधा बंद ।

18213 नवजात खतरे में भविष्य में इनकी प्रतिरक्षण क्षमता प्रभावित।

HMIS में 29 फरवरी से 13 मार्च तक 0% इंट्री राष्ट्रीय वेबसाइट से गायब हुआ MP

50 जिलो में विधानसभा प्रश्नो का उत्तर डेटा इंट्री ओपेरटर के कारण नहीं भेजे

5000 के लगभग SHC बंद 900 से ज्यादा प्राथमिक स्वास्थ केंद्र पे कोई कर्मचारी न होने से प्रसव बंद । 278 NRC बंद 29 जिला अस्पतालों के SNCU प्रभावित।

TB के 18000 मरीजो को डॉट्स नहीं मिलने से रेसिस्टेंस हो गया है, जिससे TB दूसरे लोगो में फैलने का खतरा बढ़ गया

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VHND सत्र ना लगने से 4 लाख ग्रामीण महिलाओ की जांच और बच्चों का टीकाकरण और अन्य सुविदा नहीं मिली।

जाहिर है ये हड़तालें प्रदेश में मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह और भाजपा शासन की अव्‍यवस्‍था की कलई खोलती हैं। हड़तालें आज नहीं तो कल खत्‍म हो जाएंगी, लेकिन सरकार के सुशासन पर जो सवाल उठेंगे वह निश्‍चित ही सत्‍ता के लिए खतरे की घंटी होंगे। – संदीप नाईक


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