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दिल्ली पुलिस और मीडिया द्वारा आतंकवादी बनाये गये अब्दुल करीम टुंडा को पटियाला कोर्ट 1998 के बम विस्फोट के आरोपों से बरी कर दिया है। सिस्टम को मीडिया की संघी जहनियत को टुंडा ने झेला है टुंडा पर पेशी के दौरान हिंदु चरमपंथियों की तरफ से वैसा ही हमला हुआ था जैसा बीते दिनों “कनहैय्या” पर किया गया था।

हां उस वक्त किसी पत्रकार ने लंबा मार्च नहीं निकाला था क्योंकि मीडिया अदालत से पहले ही टुंडा को आतंकवादी घोषित कर चुका था। अब टुंडा बम फोड़ने के मामलों में बरी हो गया है। टुंडा पर कचहरीपरिसर में हमला करने वालों से लेकर मीडिया में बैठे पूर्वागृह से भरे हुऐ दिमाग क्या अब नैतिकता का परिचय देंगे ?

क्या वे आतंकवादी न होते हुऐ भी टुंडा को आतंकवादी लिखने के लिये माफी मांगेंगे ? क्या वे अपना सर शर्म से झुकायेंगे और उतना ही कवरेज टुंडा को देंगे जितना तीन साल पहले उसकी गिरफ्तारी के वक्त दिया गया था ? जाहिर वे ऐसा कुछ नहीं करेंगे क्योंकि वे तो टुंडा को “याकूब मेमन” देखना चाहता थे मगर न्यायलय ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। टुंडा ने वह सब सहा है जैसा एक “मुसलमान” को अपने नाम और पहचान के नाम पर सहना पड़ जाता है।

वसीम अकरम त्यागी - लेखक जाने माने पत्रकार है
वसीम अकरम त्यागी – लेखक जाने माने पत्रकार है


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