ind muslim

इस मुल्क की बदनसीबी ही नहीं तो और क्या के जिन लोगों के बुज़ुर्गों ने इस मुल्क की तहफ़्फ़ुज़ के लिए अपनी जानों के नज़राने पेश किये सब कुछ निछावर किया…फांसी के फंदों पर झूले ….! लेकिन अफ़सोस के आज मुसलमानों को हर तरफ से घेरने की कोशिश हर लम्हा इन फिरकापरस्तों की जानिब से की जा रही है.भगवा आतंकी दनदना रहे है लेकिन उन्हें बजाय देशद्रोही या गद्दार कहने के उन्हें राष्ट्रवादी कहा जाता है.और मुसलमानों तथा दलितों पर अत्याचार के पहाड़ तोड़े जा रहे है.मुस्लिम काईद उन्ही के सुर में सुर मिलाकर मुसलमानों पर ही तंज़ कसने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है.ऐसा लग रहा है के मुस्लिम पिछड़ी जातियों से भी पिछड़ा बनता जा रहा है.जमात ए इस्लामी की जानिब से बुलाये गए एक प्रेस कॉनफेरेन्स में मीडिया के लोग बे जिझक सवाल उठाते है के मुसलमान जब आतंवादी घटना होती है तो उसकी मज़म्मत क्यों नहीं करते,?मुस्लिम धर्मगुरु क्यों सडकों पर आकर एहतेजाज नहीं करते..वगैरा जब के सच्चाई ये है के किसी भी आतंकी घटना को मुस्लिम रहनुमाओं ने नरम लहजे में हिमायत तक नहीं की.जब भी ऐसा होता है तो सख्त अलफ़ाज़ में मज़म्मत की है.और हकीकत तो ये है के जब आतंकवादी या खून खराबे के किसी भी वारदात को मज़हब से नहीं जोड़ा जा सकता फिर क्यों कर मुस्लिम समाज को ज़िम्मेदार ठहराया जाता है.आखिर क्या वजह है के मुसलमानों में इस तरह की अहसास ए कमतरी पैदा की जा रही है.क्या आतंकवादी घटनाओं के लिए सिर्फ मुस्लिम समाज ही ज़िम्मेदार है..?आखिर कब तक हमारी बेगुनाही की सफाई पेश करते रहेंगे ..?

दूसरी तरफ तस्वीर ये है के जब से मोदी सरकार हुकूमत में आयी है दलितों और मुसलमानों पर भगवाधारियों ने हमले तेज़ किये है.आतंकवाद के नाम पर कई बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारियां अब हमारे लिए नयी नहीं रही.बम धमाके होते ही मुस्लिम नौजवानों को गिरफ्तार किया जाता है.आठ-दस साल तक जेलों में रख कर ज़िन्दगियों को बर्बाद किया जाता है.फिर मुकद्दमों से बरी हो जाते है.जब कैद खानों से बहार आते है तो ज़िन्दगी पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी होती है,बच्चों के इंतज़ार में कई वालिदैन दुनिया से चल बसे होते है.अगर गिरफ्तार नौजवान बेगुनाह है तो फिर गुनाहगार कौन है..?असल गुनाहगार कौन… फिर धमाकों को अंजाम देनेवाले आतंकवादी कौन..?क्या इस देश में मुसलमान होना ही आतंकवादी होने के लिए काफी है..?हमारे लिए मालेगांव का मुकद्दमा बेहतर मिसाल बन सकता है.इसे अंजाम देनेवाले भगवा आतंकवादी थे ..और पकड़ा गया मुसलमानों को…इस देश में कई ऐसे वाक़ियात हुए जिसमे भगवाधारियों का हाथ होने की दलीले सामने आयी.बड़े से बड़े फसाद को अंजाम दे कर ..धर्म के नाम पर खून खराबा कर के हुकूमत हासिल करना अब सबसे आसान रास्ता बनता जा रहा है.यूपी के इंतेखाबात नज़दीक आ रहे है तो गोरक्क्षा के नाम कैसा आतंक फैलाया जा रहा है सब देख रहे है.सिर्फ हांडी में गोश्त होने की बुनियाद पर अख़लाक़ को तो पिट पिट कर मारा जाता है.लेकिन राजस्थान के गोशाला में भूख की वजह से सेंकडो गाय हर रोज़ मौत के घाट उतरती है तो गोमाता की फ़िक्र नहीं होती.अगर कानून सब के लिए एक है तो जुर्म को धर्म की तराज़ू में क्यों तोला जाता है.मुसलमानों को ही कब तक मुजरीमो के कटघरों में खड़ा किया जाएगा..?

हाल ही में नंदलाल महाराज नाम का हिन्दू शख्स भारत में बम धमाकों को अंजाम देने के लिए आया था जिसे जैसलमेर में गिरफ्तार कर लिया गया ३५ किलो आरडीएक्स भारत में पहले ही पहुँचा चूका है.आईबी,राजस्थान पुलिस के पूछताछ में धमाकों को अंजाम देने की साज़िशों को कबूल चूका है.इससे पहले भी पठानकोट हमले में हुकूमत की जानिब से कई अफसर पूछताछ की ज़द में आ चुके है जिसमे कोई मुस्लिम नहीं. माधुरी .गुप्ता नाम की औरत जिसे भारतीय ख़ुफ़िया विभाग ने पकड़ लिया था जब के माधुरी गुप्ता भारतीय ख़ुफ़िया विभाग के लिए ही काम कर रही थी.आर.के शर्मा जो खुद रॉ के लिए काम करते थे आज शक के दायरे में आचुके है एक और एयरफोर्स अफसर रंजीत केके जिसे २०१५ में पाकिस्तान के आएसआई के लिए काम करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया एयरफोर्स अफसर रंजीत केके पर ये इलज़ाम है के भारत के एयरबेस की इत्तेला पाकिस्तान की खुफिया तंज़ीम आईएसआई को फ़राहम कर रहा था.. .और कई वाकिये ऐसे है जिनका मुस्लिम समाज से कोई लेना देना नहीं था.तो फिर क्यों कर हिन्दू समाज को कटघरे में खड़ा नही किया जाता.क्या सिर्फ मुसलमानों को ही जवाब देह होना होगा..?क्यों किसी हिन्दू संघटन ने कोई जुलुस,कोई रैली नहीं निकाली और इन घटनाओं की निंदा नहीं की.ऐसे वक़्त में मीडिया खामोश क्यों रहता है.

ये तारीख रही है के मुसलमान गद्दार नहीं हुआ करते.और अगर एकाध मिसाल दे भी दो तो ऐसे तो हर मआशरे में हर समाज में मिलेंगे..फिर क्या मुसलमानों को ही हर बार सफाई देनी होंगी..जब कोई हिन्दू या कोई और पकड़ा जाता है तो मीडिया भी ख़ामोशी इख्तियार किये हुए रहता है.तब क्यों ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं बनाई जाती..

मुल्क को अगर वाकई तरक्की की राह पर ले जाना है तो जुर्म को जुर्म ही समझे ना के उसे धर्म की नज़रों से देखे.ये मुल्क ज़माने से मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब का गुलदस्ता बन कर महकता रहा है.अगर इसी लोकशाही या जम्हूरियत को ख़तम कर के हिन्दू राष्ट्र के रंग में रंगाने की कोशिश की गयी तो वक़्त दूर नहीं के मुल्क तबाह ओ बर्बाद हो जायेगा. धर्म की आड़ में नफरत का खेल खतरनाक साबित हो सकता है.आज दलितों पर हमलों ने मुल्क की सियासत को मोड़ दिया है.प्रधानमंत्री कुछ कहते है उनके चेले चपाटे कुछ करते रहते है.झूट का बोलबाला बहोत देर तक नहीं हो सकता.जित सच्चाई की होती है.तुम वक़्ती तौर पर झुटे वादों की बुनियाद पर कुर्सी पर बैठ तो सकते हो लेकिन मुल्क में अमनो शांति बहाल नहीं कर सकते.पिछले दो महीनों से कश्मीर में कर्फ्यू है.अवाम गुस्से में है.लोग बेहाल है.आज भी इस मुल्क में लाश को कंधे पे उठा कर दस किलोमीटर समशान तक जाना पड़ता है.दूसरे मुल्क के लोग मदद करने का ऐलान करते है.इससे बढ़कर हमारी ज़िल्लत क्या हो सकती है.देश के अंदरूनी मामलात को बेहतर बनाने की बजाय हमारे वज़ीरे आज़म बलूचिस्तान की फ़िक्र में लगे है.बाढ़ से लाखो लोग मुतास्सिर है.आज भी इस मुल्क में सेंकडो मासूम बच्चे भूखे सोते है.इन्हें दो वक़्त की रोटी दिलाने की फ़िक्र करे.बजरंगदल,रामसेना हिन्दूसेना जैसी प्राइवेट सेना को सिर्फ धर्म और नफरत की राजनीती हासिल करने के लिए बढ़ावा ना दे.छोटी से छोटी वारदात को मुसलमानों को ज़िम्मेदार ठहराना छोड़ दे.इस लिए के मुसलमानों के बगैर इस मुल्क की तरक्की मुमकिन नहीं.मुसलमानों के बगैर तो इस मुल्क का वजूद ही मुमकिन नहीं.

मुसलमान भी सवाल करनेवाले बने.अपनी ख़ामोशी को तोड़ कर जवाब देनेवाले बने.फिरकापरस्त चाहते है के मुसलमानों में अहसास ए कमतरी पैदा हो.हमें मुख़्तलिफ़ मसलकों में,मुख़्तलिफ़ सियासी पार्टियों में इस लिए बाटा गया के हमारे इत्तेहाद को कमज़ोर किया जाय.और मुन्तशिर कौम हमेशा मज़लूमियत के साये में जीती रहती है.मज़लूम कभी अपने हक्क को हासिल नहीं कर सकता.इस मुल्क के दस्तूर ने इस लोकशाही ने हमें भी वही हक्क दिया जो हर एक भारतीय को दिया है.हम अपने आप को कमज़ोर ना समझे.हमने ही इस मुल्क को आज़ादी दिलाई है.ये मुल्क हमारा है.इसकी मिटटी में हमारे बुज़ुर्गों का खून शामिल है.मुसलमानों ने जितनी कुर्बानियां इस मुल्क को आज़ाद करने में दी है उतनी किसी और ने नहीं दी है.कब तक हम यूँ ही अपनी हुब्बुल वतनी,अपनी देशभक्ति के सबुत देते रहेंगे..और उन लोगों को तो हम पूछते है बताओ तुमने इस मुल्क की खातिर क्या किया हमने तो अपना सब कुछ निछावर किया है….अब हम सफाई नहीं देंगे…हम अब तुम्हे पूछेंगे..बताओ तुमने इस देश के लिए क्या किया

-इक़बाल अहमद जकाती ,संपादक पैगाम ए इत्तेहाद (राष्ट्रीय साप्ताहिक) बेलगाम कर्नाटक

नोट – यह लेखक के निजी विचार है कोहराम न्यूज़ लेखक द्वारा कही किसी भी बात की ज़िम्मेदारी नही लेता 


लाइक करें :-


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें

कमेंट ज़रूर करें