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एडवोकेट एस वारसी

आतंकवादी हमला, सोशल मीडिया पर सिलिंडर ब्लास्ट :-

जब से यह खबर आई है की सऊदी अरब में कातिफ और जेद्दाह पर खुद्कुश हमले के बाद मस्जिदे नबवी के पास आतंकवादी हमला हुआ है तो पाकिस्तान से लेकर भारत तक सोशल मीडिया पर बड़े बड़े ज़िम्मेदार लोग एक ही मेसेज कॉपी पोस्ट करने में लगे हुए हैं की मदीना शरीफ से मेरे भाई या जानने वाले ने बताया है की बम ब्लास्ट की खबर झूठी है और सिर्फ कार पार्किंग में कार में आग लगी है!

तो कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं की सऊदी में उनके जानने वालों ने बताया की पास की बिल्डिंग में जनरेटर में ब्लास्ट हुआ जिसकी वजह से कार में सिलिंडर फट गया यह कोई खुद्कुश हमला नहीं है अफवाहे न फैलाएं !

सऊदी हुकूमत क्या कहती है ?

तमाम अख़बारों की यही सुर्ख़ियों हैं की मस्जिदे नबवी के करीब आतंकवादी हमला हुआ है!

यहाँ तक की किंग सलमान तक ने आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कारवाही की चेतावनी भी दी है!

सऊदी इंटीरियर मिनिस्ट्री के प्रवक्ता ने सऊदी की सरकारी प्रेस एजेंसी SPA को बताया है मग़रिब से पहले सुरक्षा कर्मियों ने कार पार्किंग से मस्जिदे नबवी की तरफ एक आदमी को सन्दिग्ध हालत में जाते देखा और उसको टोका और पास जाकर चेक करने की कोशिश की तो उसने खुद को अपने शरीर में बंधी बेल्ट बम से उड़ा लिया जिसमे चार पुलिस कर्मी शहीद हो गए और पांच ज़ख़्मी अस्पताल में दाखिल हैं ! 

सऊदी इंटीरियर मिनिस्ट्री ने इस हमले पर कहा है कि आतंक की नाकामयाब गन्दी ज़हनियत ने इस हमले में न जगह देखी और न वक़्त जिससे यह साफ़ साबित होता है कि यह  कितनी बुरी तरह गुमराह हो चुके हैं!इसके साथ ही इंटीरियर मिन्सिट्री के ऑफिसियल ट्विटर अकाउंट से भी आतंकी हमले की तस्दीक की गयी है!

अरब न्यूज़ ने सऊदी अरब और यूऐई के तमाम बड़े मुफ्तियों के मज्ज़मती बयान लगाये हैं ! सऊदी की कौंसिल आफ सीनियर स्कोलर्स ने इस घटना पर कहा है की आतंकवादी नाकामयाब हुए और कुछ न पा सके, जब भी तुम इस तरह की कोशिश करोगे हमे मुत्तहिद पाओगे!

सऊदी एनर्जी और इंडस्ट्री मिनिस्ट्री ने कहा है इस तरह के हमले हमारी जद्दोजहद को और मज़बूत करेंगे!

अरब लीग के जनरल सेक्रेटरी अहमद अबू अल्गैत ने कहा है कि इस हमले से साबित होता है की आतंक का कोई मज़हब नहीं होता!

सिलिंडर ब्लास्ट के दावे कहाँ से ?

अब सवाल यह पैदा होता है कि कहाँ से इस तरह के दावे कहाँ से आने शुरू हुए कि यह आतंकी हमला नहीं सिलिंडर ब्लास्ट था?

इसका जवाब यह है की मुस्लिम कौम में ऐसा तबका मौजूद है जो हर आतंकवादी हमले को या तो सही ठहरा दिया करता है या उसको अमेरिका इजराइल की चाल बताकर पल्ला झाड लेता है जैसे पेशावर में स्कूली बच्चों के क़त्ले आम पर भी एक तबका ऐसा था जिसको यह लग रहा था की यह हमला अमेरिका ने करवाया है! यही तबका यह भी कहता है की किसी मुस्लमान को बुरा मत कहो जेहादी ऐसा नहीं कर सकते!

वह तबका पूरे सीरिया इराक में ISIS की काली करतूतों को अमेरिका और शिया वर्ग के खिलाफ जिहाद बोलकर सही बताता रहा और जब इनसे सुन्नी दरगाहों को शहीद करने और उलेमा ,इमामो के क़त्ल की बात की गयी तब भी इसने शिर्क करने की वजह से उनके क़त्ल को जायज़ क़रार दिया!

क्या कहता है इतिहास ?

अहले हदीस मौलवी मेराज रब्बानी और इसके पहले सऊदी उलेमा का एक तबका यह मानता आया है कि मस्जिदे नबवी में गुम्बदे खिजरा को शहीद करने की ज़रूरत है क्यूंकि इस्लाम के शुरूआती दौर में गुम्बदे खिजरा नहीं था और बाद में सल्तनते उस्मानिया ने इसको बनवाया और इससे बिद्दत और शिर्क में इज़ाफा होता है!

यह सोच उनको मिली मुहम्मद बिन अब्दुल वहाब नज्दी के फतवों से जिनको ISIS ने छपवाकर बंटवाया और अपने काले कारनामो को इस्लाम का नाम देकर इस्लाम और मुसलमानों के ही बीच फितना फ़ैलाने का काम किया यह किसी से छुपा नहीं है!

यहाँ यह बात भी काबिले गौर है कि ISIS को खड़ा करने और मज़बूत करने में सऊदी शेखों ने अहम् रोल अदा किया है और आतंकवाद का यह शैतान जिस तरह पाकिस्तान को खून के आंसू रुला रहा है उसी तरह अब वापस अपने हिमायती के घर आ चुके हैं और वहां बाकाईदा खून रेज़ी चालू कर दी है!

क्या था मकसद ?

रमजान की शाम में अफ्तार के वक़्त ज्यादा से ज्यादा लोगों को हलाक़ करने के टारगेट को हिफ़ाज़ती अमले ने नाकाम बना दिया नहीं तो दूसरा बगदाद, मस्जिदे नबवी में दोहराया जाने वाला था!

इस गंदे आतंकी हमले को हल्का करके यह बताने की कोशिश की जा रही है कि यह लोग इस्लाम के लिए लड़ते हैं यह जेहादी इस्लाम की मुक़द्दस जगह पर हमला नहीं करेंगे इसलिए इसको सिलिंडर ब्लास्ट ही माना जाए! इसको हल्का करके एक्सीडेंट में तब्दील करके बताओ नहीं तो जेहादियों की इमेज ख़राब होगी और पूरी दुनिया के मुसलमान बुरा कहेंगे!

जबकि दूसरी जगह सऊदी के ही कातिफ की शिया मस्जिद मस्जिद के पास जो हमला हुआ या जेद्दा में जिस हमले को नाकामयाब बना दिया गया वह सब जिहाद में आते हैं उसमे शक की कोई गुंजाईश नहीं ! इसके साथ ही यह मेसेज भी बहुत मजबूती से दिया जा रहा है कि सऊदी सिक्यूरिटी फूलप्रूफ़ है और इसमें कोई कमी नहीं है इसलिए सभी मीडिया झूठ बोल रही है!

अब रह गए कुछ जज्बाती वह लोग जो जाने अनजाने में इन मेसेज को शेयर कर रहे हैं वह यह बताना चाहते हैं की उनको ज्यादा अच्छी जानकारी है वजह उनके रिश्तेदार वहां या तो मौजूद थे या उन्होंने बताया है!

तीसरा वर्ग इस हमले को इसलिए हज़म नहीं कर रहा है कि मदीना में फितना उसके ईमान को बर्दाश्त नहीं हो रहा और अज़मते मदीना के पामाल होने की वह सोच नहीं सकता इसलिए वह वह मायूस है!

कुल मिलकर दुनिया भर का मुसलमान ग़मज़दा और मायूस है कि आतंक की जड़ें कितनी गहरी हो गयी हैं की आतंकवादी मस्जिदे नबवी में रोज़ा-ऐ-रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम तक आ पहुंचे हैं और शिर्क के नाम पर इस्लाम के मरकज़ में ही हमला करने को तैयार हैं और कोशिशे चालू कर दी हैं!

इसी बीच अन्य मुल्को के सुन्नी उलेमा की जानिब से यह मांगे भी उठने लगें तो कोई हैरत नहीं होगी कि मदीना और मक्का की हिफाज़त का इन्तेजाम तमाम मुस्लिम मुल्को के मुत्तहिद दस्तों को दिया जाये क्यूंकि इस्लाम के इन मराकिज़ पर सभी मुस्लिम उम्मत का हक़ है!


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