तुर्की ने इसराइल से अनुरोध किया है कि वह तुर्की के लिए गाजा में आजादाना रूप से पहुँच बनाने के लिए मदद करे, साथ ही तुर्की ने यह भी दावा किया है कि वह इस क्षेत्र को इसराइल मरजी के मुताबिक मानीटरिंग से बाहर निकालना चाहता है; लेकिन शायद इस प्रकार का कदम इसराइल के लिए गाजा में एक हथियार साबित हो जिससे वह हमास के नेताओं पर अधिक दबाव डाल सके।

Israel and Turkey in Gaza

तुर्की और इसराइल के बीच संबंधों में सुधार से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर होने वाली वार्ता का विश्लेषण पूरा हो चुका है। इसराइल सरकार ने माफी मांगी है और तुर्की को इस संबंध में होने वाले नुकसान के मुआवजे पर भी सहमति व्यक्त की है, लेकिन वह समस्या जो अब तक संतोष नहीं हुआ वह तुर्की का गाजा में स्वतंत्र पहुँच है। वास्तव में देखा जाए तो यह शर्ममिंदा करने वाली मांग है। इस समय हमारी चर्चा का विषय इसराइली सुरक्षा और वह क्षेत्र है जो क्रूर आतंकवादियों के कब्जे में है कि जिस की समृद्धि कम से कम हमें तो नहीं भाती।

हमास ने 2007 में गाजा पर अपना नियंत्रण संभाला और उसके कुछ समय बाद इसराइल ने गाजा पट्टी छोड़ दिया। पिछले एक दशक से इसराइल की यह कोशिश रही है कि वह घेराबंदी के माध्यम से हमास का चेहरा धूमिल करे और हर तरह से कोशिश करता रहा है कि हमास बेलीस्टिक मीज़ाईल्स और अन्य हथियारों के साथ सशस्त्र न हो सके जिसके नतीजे में हमास खतम हो जाएगा, लेकिन इसराइल की यह सारी कोशिशें नाकाम हुईं। इस समय में इसराइल को हमास के साथ तीन युद्ध लड़ना पड़े।

(Operation Cast Lead, January 2008 Operation Pillar of Defense, November 2012 Operation Protective Edge, July 2014)

और इन सभी युद्धों में इजरायल को हार का सामना करना पड़ा। कुछ विशेषज्ञों की राय यह है कि हमास ने अपने कौशल और क्षमताओं से एक बड़े हिस्से को फिर से हासिल कर लिया।

इसराइल में मौजूद विरोधियों का यह मानना ​​है कि इसराइल की हार का कारण IDF की ओर हमास को पूरी तरह से नष्ट करने की आज्ञा न मिलना है। हो सकता है इस बात में सच्चाई हो लेकिन इस चरण में सफलता का एक ही रास्ता गाजा पर फिर कब्जा, उसके 20 लाख निवासियों के जीवन की रक्षा, उनके लिए स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाएं और यहां के पीड़ित नागरिकों को सीवरेज सिस्टम और शिक्षा नेटवर्किंग बनाना है। इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता यहाँ परेशानियों को हल नहीं कर सकेगा। हमास को हराने, उसके नेताओं को मारने और फिर इस क्षेत्र को छोड़ देने से इस क्षेत्र में ईरान के समर्थित आतंकवादी संगठन, जिहादे इस्लामी या शायद आईएस से जुड़े कुछ लोगों के हाथों में जा सकता है। इसलिए हमने हमास को छोड़ दिया हालांकि इस प्रकार की राजनीति में सभी प्रकार की निराशा के बावजूद इसराइल कई साल से गाजा पर अपना कब्जा जमाए बैठा है। लेकिन इस घेराबंदी के साथ इसराइल इस क्षेत्र की खाद्य जरूरतों, बिजली, ईंधन, स्वास्थ्य और निर्माण सामग्री की आवश्यकताओं को पूरा करता है। इस नीति के पीछे दो उद्देश्य हैं: हथियारों की तस्करी पर रोक लगाकर वाणिज्यिक गतिविधियों को सीमित करना और यहां के लोगों को यह यकीन दिलाना कि हमास की सरकार उन लोगों के योग्य नहीं थी और उसने परोपकारी जनता को नुकसान पहुंचाया है। हो सकता है कुछ हद तक दूसरा लक्ष्य प्राप्त हो चुका है। यहां के रहने वाले लोग अत्यंत कठोर परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे हैं और उनमें से कई लोग वर्तमान सरकार से त्रस्त भी हैं। लेकिन अब तक पहला लक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ। दस साल की घेराबंदी के बाद भी हमास के पास हजारों राकेट्स और आधुनिक हथियार मौजूद है।

हालिया वार्ता में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं, और वह यह थी कि इस गंभीर जिम्मेदारी को इसराइल से लकर तुर्की के हवाले कर दिया जाए। यह बात तय हुई है कि गाजा में एक बंदरगाह का निर्माण किया जाएगा जिसका निर्माण और प्रबंधन तुर्की के हाथ में होगा। गाजा पट्टी ज्यादातर आंतरिक जरूरतों को तुर्की प्रशासित उत्तरी साइप्रस बंदरगाह के माध्यम से पारित करने जिम्मेदारी तुर्की की होगी। इस राजी पत्र के हिस्से के तहत इसराइल को तुर्की से यह पूछना होगा कि वह गाजा पट्टी के माध्यम से पारित होने वाले हथियारों पर प्रतिबंध की जिम्मेदारी अपने सिर ले। लेकिन पूरी तरह से हथियारों की प्रेषित को रोकना संभव नहीं होगा। गाजा के निवासियों की यह कोशिश होगी कि वह हर संभव तरीके से हथियार प्राप्त करें, जबतक वह अपने मोर्टार गोले टेडी बियर खिलौनों में भी छुपा सकते हैं लेकिन तुर्की भी इसे रोकने के लिए सभी प्रकार के उपाय करेगा। यह भी हो सकता है कि हथियारों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी के प्रतिनिधिमंडलों की हद तक भी बात पहुंच जाए। यह भी कहा जा रहा है कि इसी प्रकार के सिस्टम की वजह से इस क्षेत्र की निरीक्षणालय इसराइल के हाथों से ली जा रही है। लेकिन शायद इस प्रकार का कदम इसराइल के लिए गाजा में एक हथियार साबित हो जिससे वह हमास के नेताओं पर अधिक दबाव डाल सके जिनके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा। लोगों को लंबे समय के लिए शिक्षा, टूरिज़्म और अन्य प्रयोजनों के लिए देश से बाहर जाने वाले लोगों को रोकना मुश्किल खड़ी कर सकता है। इस पैटर्न में बड़ा रिस्क है, लेकिन कई वर्षों के बेनतीजा घेराबंदी और 3 व्यर्थ युद्ध के बाद, शायद यह एक नया प्रयास कहा जा सके।

बहरहाल हमें यह बात मानना ​​पड़ेगा कि इसराइल सरकार में बहुमत रखने वाले राईट विंग उपनिवेशों के लिए गाजा के दरवाजे दुनिया के लिए खोलना बहुत मुश्किल है।

(ये लेख hindkhabar.in से लिया गया है तथा इस लिंक पर आप लेख पढ़ सकते है)


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