भारत के साथ-साथ दुनियाभर में कैंसर उपचार में योग की भूमिका पर अध्ययन हुए हैं और अभी तक कहीं साबित नहीं हुआ कि योग कैंसर से पूरी तरह छुटकारा दिला सकता है

योग से कैंसर ठीक होने का दावा करके आयुषमंत्री योग पर ही सवाल उठा रहे हैं

पिछले हफ्ते आयुष मंत्री (वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के विकास के लिए बना मंत्रालय) श्रीपद यशो नायक ने दावा किया था कि योग आसनों से कैंसर जैसी बीमारियां ठीक हो सकती है और सरकार के पास एक साल के भीतर इसके प्रमाण होंगे. कम से कम कैंसर के बारे में यह बयान दुस्साहसिक ही कहा जा सकता है. इसकी तीन सीधी-सीधी वजहें हैं. जैसे पहली बात तो यही कि कैंसर कोई एक बीमारी नहीं है. कैंसर कई तरह के हो सकते हैं. कई वजहों से हो सकते हैं. इन वजहों में आनुवांशिकता से लेकर पर्यावरणीय प्रभाव तक शामिल हैं और इसलिए अलग-अलग कैंसर के उपचार की दवाएं और तरीके अलग होते हैं.

नायक की बात का दूसरा हिस्सा है कि कैंसर का उपचार एक साल में ढूंढ़ लिया जाएगा. जबकि आज कैंसर पर अनुसंधानरत दुनियाभर के वैज्ञानिक उपचार की बेहतर तकनीकों की खोज में ही लगे हुए हैं, कैंसर को पूरी तरह दूर करने का पक्का उपाय तो उनकी पहुंच से भी दूर है.

कैंसर पर अनुसंधानरत दुनियाभर के वैज्ञानिक उपचार की बेहतर तकनीकों की खोज में ही लगे हुए हैं, कैंसर को पूरी तरह दूर करने का पक्का उपाय तो उनकी पहुंच से भी दूर है

नायक के बयान हिसाब से कैंसर के लाखों गंभीर पीड़ितों के लिए योग रामबाण उपाय है. उन्होंने कहा है कि अनुसंधान से साबित हो चुका है कि कैंसर योग से ठीक किया जा सकता है. उनके मुताबिक बेंगलुरू के स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान ने कैंसर की रोकथाम की तकनीक ईजाद कर ली है और जो लोग नियमितरूप से योगा करते हैं उन्हें कीमोथैरेपी की जरूरत नहीं होती. नायक का यह दावा भ्रामक है क्योंकि अभी तक दुनियाभर में हुए अध्ययनों से यह बात पता चली है कि योग कैंसर उपचार में सहायक तो साबित हो सकता है, लेकिन अपने आप कैंसर को ठीक नहीं करता. इस लिहाज से देखें तो आयुषमंत्री का बयान एक उपयोगी और कई मायनों में कारगर वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को खुद-ब-खुद सवालों के घेरे में खड़ा सकता है.

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योग कैंसर के उपचार किस तरह सहायक भूमिका सकता है

कैंसर पर योग के प्रभाव से संबंधित हालिया अनुसंधानों से यह बात जाहिर हुई है कि नियमित योगाभ्यास से जीवनशैली सुधरती है, कैंसर के उपचार से पैदा हुए दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है और यहां तक कि दर्द भी कम किया जा सकता है.

पिछले महीने चिकित्सा जर्नल – इंडियन जर्नल ऑफ सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के अंक में विवेकानंद संस्थान के चांसलर एचआर नागेंद्र और उनके सहयोगियों का एक पत्र छपा है. इसमें कहा गया है कि अब समय आ गया है जब योग को कैंसर की उपचार प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा बना दिया जाए. योग उपचार से संबंधित थकावट, नींद में आने वाली गड़बड़ियों, कीमोथैरेपी के बाद आने वाले चक्कर और दर्द को कम करता है. इस पत्र के मुताबिक यह पाया गया है कि योग सर्जरी के बाद प्रतिरोधी तंत्र को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होता है. रेडियोथैरेपी से डीएनए को पहुंचने वाले नुकसान को भी यह घटाता है.

योग सर्जरी के बाद प्रतिरोधी तंत्र को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होता है. रेडियोथैरेपी से डीएनए को पहुंचने वाले नुकसान को भी यह घटाता है

दुनिया के दूसरे हिस्सों में हुए अनुसंधान भी कुछ यही बात बताते हैं. हालांकि ज्यादातर अनुसंधान स्तन कैंसर के इलाज में योग के प्रभाव से जुड़े हैं. ऐसा ही एक बड़ा अनुसंधान यूनिवर्सिटी ऑफ ओहियो में किया गया था. इसके तहत 200 स्तन कैंसर पीड़िताओं (कैंसर सर्वाइवर) के ऊपर अध्ययन किया था. इनमें से किसी का भी पहले योग से वास्ता नहीं रहा था. इन महिलाओं के दो समूह बनाए गए. एक समूह को 12 हफ्ते तक हर हफ्ते 90 मिनट की दो योग कक्षाओं में शामिल किया गया.

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इस अनुसंधान के नतीजे 2014 में जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुए थे. इनके मुताबिक योग करने वाले समूह की महिलाओं में होने वाली थकावट दूसरे समूह की महिलाओं की अपेक्षा कम हो गई थी. प्रयोगशाला में जब इनके खून का परीक्षण हुआ तो पता चला कि योग करने वाले समूह की महिलाओं में इम्फ्लेशन (मोच, जलन, सूजन) के लक्षण भी कम हो गए थे.

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2012 में जर्मनी के विशेषज्ञों ने कुछ स्तन कैंसर पीड़ितों के इलाज में योग को सहायक थैरेपी की तरह इस्तेमाल करके इसके नतीजे परखे थे. विशेषज्ञों के मुताबिक पीड़ितों को कुछ अवधि के लिए इससे मनोवैज्ञानिक लाभ मिले थे.

न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मेमोरियल स्लोन कैट्टरिंग कैंसर सेंटर की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक योग से फेंफड़ों के कैंसर के उपचार में मदद मिल सकती है

कैंसर के उपचार में योग की सहायक भूमिका से संबंधित एक अध्ययन यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवानिया में भी हुआ था. प्रोस्ट्रेट कैंसर के मरीजों पर हुए इस अध्ययन के नतीजे पिछले साल नवंबर में प्रकाशित हुए थे. इनके मुताबिक योग कैंसर उपचार से पैदा हुए दुष्प्रभावों को कम कर सकता है.

न्यूयॉर्क के प्रतिष्ठित मेमोरियल स्लोन कैट्टरिंग कैंसर सेंटर की वेबसाइट पर दर्ज जानकारी के मुताबिक योग से फेंफड़ों के कैंसर के उपचार में मदद मिल सकती है. वेबसाइट बताती है कि योग करने से फेंफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और मरीज को बेहतर नींद आने लगती है.

ये कुछ उदाहरण बताते हैं कि योग कैंसर के उपचार की जटिल प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण हिस्सा तो हो सकता है लेकिन यह दावा सही नहीं है कि इससे बीमारी जड़ से ठीक हो जाए. या कैंसर का यही एकमात्र पक्का उपचार है.

(यह हमारी सहयोगी वेबसाइट स्क्रोलडॉटइन पर प्रकाशित आलेख का संपादित स्वरूप है)


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