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वसीम अकरम त्यागी

उत्तर प्रदेश में 15000 के ऐसे लड़ाके तैयार किये गये हैं जो आतंकी संगठन आईसिस से मुकाबला करने के लिये प्रशिक्षिण शिविर चला रहे हैं। अव्वल तो भारत में आईसिस जैसा कोई खतरा नहीं है, और अगर भविष्य में ऐसा खतरा पैदा भी हो जाता है तो उसके लिये भारतीय सेना है। इन संगठनों पर मुहर यह लगी है कि ये आईसिस से लड़ने के लिये लड़ाके तैयार कर रहे हैं, मगर सच्चाई यह है कि आईसिस तो महज एक बहाना है इन संगठनों का असल मकसद भारत को गृह युद्ध में झौंकना है।

धर्म रक्षा, हिन्दू रक्षा के नाम पर युवाओं का ब्रेन वॉश किया जा रहा है और उनके दिलो दिमाग में मुसलमानों के लिये नफरत भरी जा रही है। इन संगठनों का कुकुरमुत्तों की तरह उग आना इस बात की दलील है कि या तो सरकार इन्हें रोकने में नाकाम रही है या फिर सरकारों का इन्हें समर्थन प्राप्त है।

अब से पहले इस देश में धर्म रक्षा के नाम पर जितनी भी सेनाओं का गठन किया गया है वे सब की सब किसी न किसी सांप्रदायिक हिंसा में हत्या, लूट, बलात्कार करने में शामिल रही हैं। अब आईसिस के नाम पर लोगों को आसानी से धोखा दिया जा सकता है, आसानी से उन्हें विदेशी आतंकवाद का भय दिखाकर देशी आतंकी बनाया जा सकता है। और यह काम बखूबी अंजाम भी दिया जा रहा है। इन संगठनों को किसने यह अधिकार दे दिया कि ये धर्म के नाम पर युवाओं को भ्रमित कर सकें, उन्हें एक आतंकी संगठन का भय दिखाकर दूसरा आतंकी बना सकें। अगले साल उत्तर प्रदेश में चुनाव होने हैं, और उससे पहले हो सकता है कि ‘मुजफ्फरनगर’ दोहराया जाये ऐसे संगठन ही मुजफ्फरनगर जैसी हिंसाओं के षड़यंत्रकारी होते हैं।

जिन पर लेबल तो धर्म का लगा होता है मगर काम राक्षसों वाले करते हैं। सरकार अगर समय रहते इन संगठनों के खिलाफ कार्रावाईन नहीं कर पाई तो इसके गंभीर परिणाम इस देश को भुगतने पड़ेंगे। हाथों में तलवारें, बल्लम, बरछी, कुदाल, त्रिशूल लेकर, ये आईसिस से लोहा नहीं ले रहे हैं, बल्कि खुद आईसिस बनने जा रहे हैं।

  • लेखक जाने माने पत्रकार और समाजसेवी है 


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