तनिक भी भ्रमित मत होइयेगा कि अब क्यों नाॅट इन माई नेम… अब तो बंगाल में मियाँ भाई भी गदर काट दिये। हाँ काट दिये तो… इसीलिये तो शायद अब ऐसे बैनर की जरूरत और प्रासंगिक हो उठी है, क्योंकि अब वह हिंदू, जो इस अभियान में हमारे साथ हमारी आवाज उठाने आया था, वह कशमकश में पड़ा हमें देख रहा है।

क्या था औचित्य इस अभियान का… यही न कि धर्म या आस्था के नाम पर हिंसक होती भीड़ का विरोध। सड़क पर होते इंसाफ के नंगे प्रदर्शन के खिलाफ एकजुट कोशिश… लेकिन बंगाल में तो इसी कोशिश को पलीता लगा दिया गया। साबित कर दिया कि धर्म या आस्था के नाम पे हिंसक होने वाली भीड़ भगवा ही नहीं हरी भी होती है।

चालीस पचास साल के मर्द अधेड़ मशाले लिये एक लड़के का घर फूंकने चल पड़े… खुद आपने मैच्योरिटी दिखाई न और उस सोलह-सत्रह साल के लड़के से मैच्योरिटी की उम्मीद कर रहे थे? इस बात का कोई मतलब नहीं कि यह संघ या भाजपा की साजिश है… हाँ है तो? नाक से खाना तो नहीं खाते होंगे न आप, तो कैसे सब जानते हुए संघ/भाजपा की साजिश में फंस जाते हैं।

और पढ़े -   राम पुनियानी: रोहिंग्याओं को आतंकवाद से जोड़ने वाले क्षुद्र और नीच प्रवृत्ति के लोग

नाॅट इन माई नेम के बैनर तले आपका प्रतिकार इसलिये भी तो था कि अगर कोई गौकशी या गौमांस भक्षण का दोषी भी है तो उसे पुलिस के हवाले कीजिये, और कानून जो भी उचित कार्रवाई समझे, करे… लेकिन जैसी ही चोट अपनी आस्था पर आयी तो कानून पर से विश्वास डिग गया और निकल पड़े सड़कों पर भीड़ बनके इंसाफ करने।

पहले कमलेश तिवारी ने और फिर सौविक सरकार ने जो किया वह फेसबुक पर हर रोज होता है और सैकड़ों बार होता है, लेकिन खैर बाकियों की तरफ से आंखें मूंद कर आप जिसे ‘चिन्हित’ कर पायें, उसके खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई करवाइये और उस पर संतुष्ट होना सीखिये।

और पढ़े -   रवीश कुमार: असफल योजनाओं की सफल सरकार 'अबकी बार ईवेंट सरकार'

यह क्या कि भीड़ बन के सड़कों पर आतंक फैला कर दोषी के लिये फांसी की मांग करना… इस्लामिक हुकूमत है भारत में? शरिया लागू है कि ईशनिंदा कानून के तहत पैगम्बर पर उंगली उठाने वाले को फांसी पर लटका दिया जाये? आप अपने लिये तो सेकुलर मुल्क चाहते हैं, जहां एक अल्पसंख्यक के बावजूद आपको सारे अधिकार और सुरक्षा मिले, लेकिन दूसरों को सेकुलर मुल्क देने में क्यों पीछे हट जाते हैं? क्यों आपका धर्म घर से निकल कर सड़कों पर उतर आता है?

जिन्होंने बंगाल में यह हिंसक भीड़ बनाई, जितने वे दोषी हैं, उतने ही दोषी वे भी हैं जो एसी हरकतों को अपने कुतर्कों से जस्टिफाई करते हैं… बजाय खुल कर, मुखर हो के विरोध करने के। बजाय आगे आ कर लोगों को यह बताने के… कि हम बंगाल में आस्था को लेकर दंगा करने वाली भीड़ के भी उतने ही खिलाफ हैं, जितने अखलाक या जुनैद को मारने वाली भीड़ के हैं।

और पढ़े -   आखिर क्यों अन्य राष्ट्रों को उत्तर कोरिया के विनाश में दिलचस्पी है?

नाॅट इन माई नेम के तहत आपके हक की आवाज उठाने वाले और आपकी तकलीफ पर आपके साथ खड़े होने वाले हिंदू देख रहे हैं आपकी तरफ… खुद से आगे बढ़िये और उन्हें यकीन दिलाइये कि गलत बात पर अपने धर्म के लोगों का भी समर्थन हम नहीं करते।

देश सबका है, समस्यायें भी सबकी हैं और उनसे लड़ने के लिये साथ भी सबका चाहिये… मेरा तेरा करके लड़ाइयां नहीं लड़ी जातीं। गलत को हर हाल में मुखर हो के, बआवाजे बुलंद गलत कहने की आदत बनानी होगी।

आपको खुल के कहना होगा कि मजहब या आस्था के नाम पे हिंसक होने वाली किसी भी भीड़ का समर्थन हम नहीं करेंगे, फिर चाहे वह भीड़ हमारे अपने ही लोगों की क्यों न हो।

नाॅट इन माई नेम सबके लिये है… और हर हिंसक भीड़ के खिलाफ एक कोशिश है।

~ Ashfaq Ahmad

वाया हिमांशु कुमार


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE