उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीज़ो मैं भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद महंत योगी आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर क़ाबिज़ हो चुके हैं! नतीज़े आते ही बीएसपी सुप्रिमो मायावती ने इसे ईवीएम से छेड़छाड़ का नतीज़ा और लोकतंत्र की हत्या करार दिया, तो कुछ लोगो ने सांप्रदायिक धुर्विकरण का नतीज़ा माना है! हालाँकि खुद भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी के केंद्र मैं किए गये कामो पर जनता की मोहर करार दिया है!

प्रदेश मैं भाजपा के क़ाबिज़ होने और महंत योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बन जाने के बाद से प्रदेश के मुसलमानो मैं एक अज़ीब सा घबराहट देखने को मिल रही है! कुछ हद तक उनकी यह घबराहट और घुटन बेवजह भी नही है! हिंदुत्व की राजनीति और मुस्लिम विरोधी बयानबाज़ी करने का कुछ भाजपा नेताओ का इतिहास रहा है! और इसमे वरिष्ठ सांसदो के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के नये मुख्यमंत्री भी शामिल रहे हैं! पूरे देश की तरह उत्तर के मुसलमानो के हालातो पर नज़र डाली जाए तो अंदाज़ा हो जाता है, प्रदेश के मुसलमानो के पास खोने के लिए कुछ भी नही है!

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प्रदेश सरकारे वक़्त के साथ-साथ बदलती रही, कथित सेक्युलर सपा, बसपा तो कभी कांग्रेस ने प्रदेश पर राज़ किया लेकिन प्रदेश की इस 22 प्रतिशत आवादी के हालात कभी नही बदले! मुसलमान आर्थिक, सामाजिक, व शेक्षणिक तौर पर लगातार पिछड़ता रहा! गंदी मलिन बस्तियाँ, अशिक्षा, निम्न स्तर के काम, नोकरियो से दूरी, देश निकाला की धमकियाँ, और पल-पल दंगो मैं नुकसान उठाने का डर मुसलमानो का मुक़द्दर बनकर रह गया! वक़्त वक़्त पर यह एक मुश्त वोट बेंक बनकर यह दूसरो की क़िस्मत बनाता रहा! और बदले मैं मिले सिर्फ़ झूठे वादे, और पूरी ना होने वाली उम्मीदें! ऐसे मैं मुझे लगता है मुसलमानो से ज्यादा उन वर्गो को परेशान होने की ज़रूरत है जो सपा और बसपा की मेहरबानियो से कुर्सीयो पर बना बेठा है और आरक्षण से फायदे उठा रहा है!

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अब यह भी देखना दिलचस्प होगा, प्रदेश की नई सरकार आरक्षण पर क्या फ़ैसला लेती है! क्योंकि भाजपा की मातृ संस्था आरएसएस खुद आरक्षण विरोधी रही है, और भाजपा के वोटर में सामान्य जाति से ताल्लुक़ रखने वाला वह वोटर बड़ी तादात मैं है जो आरक्षण के खिलाफ है! तो दूसरी तरफ भाजपा को दलित और पिछड़े वर्ग के ऐसे वोट बड़ी तादात मैं मिले हैं जो भाजपा की हिंतुत्व की राजनीति से प्रभावित हैं! इस बड़ी कामयाबी मैं भाजपा सभी जाती और धर्मो का सहयोग मान रही है, तो ऐसे मैं नई सरकार की ज़िम्मेदारी काफ़ी ज्यादा बढ़ जाती है!

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वसीम अख़्तर बरकाती

उम्मीद की जानी चाहिए कम से कम अब तो सबका साथ और सबका विकास का नारा पूरा होगा! क्योंकि केंद्र और राज्य दोनो मैं भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकारे हैं, तो ऐसे मैं बहानेबाजी की कोई गुंजाइश ही नही बचती! भाजपा ने जिस सुशाशन और मज़बूत क़ानून व्यवस्था देने का वादा किया है, उसे पूरा करना उनकी प्राथमिकता मैं होना चाहिए!

(लेखक उत्तर प्रदेश से मुस्लिम स्टूडेंट्स आर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इंडिया के प्रदेश संयोजक हैं)


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